गंगाजल का नियमित इस्तेमाल करने वालों में Covid-19 का खतरा नहीं, शोध में ​किया गया दावा

  • Research On Ganga Water : गंगाजल में कोरोना से लड़ने की क्षमता को परखने के लिए करीब 100 जगहों पर सैंपलिंग की गई थी
  • यह शोध बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में आईएमएस (IMS) की टीम की ओर से किया गया है

By: Soma Roy

Published: 21 Sep 2020, 01:22 PM IST

नई दिल्ली। गंगाजल (Gangajal) का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इसे मोक्ष दायिनी माना जाता है। मगर अब इसके हेल्थ बेनेफिट्स (Health Benefits) भी देखने को मिल रहे हैं। इसमें मौजूद मिनरल्स एवं अन्य गुणकारी तत्व शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। इतना ही नहीं ये कोरोना वायरस जैसे घातक रोग से लड़ने में भी सक्षम है। ये दावा अमेरिका के इंटरनेशनल जर्नल ऑफ माइक्रोबायोलॉजी (International Journal of Microbiology) के अंक में प्रकाशित एक शोध में किया गया। जिसमें कहा गया कि गंगाजल (Ganga Water) का नियमित इस्तेमाल करने वालों पर कोरोना वायरस (COVID-19 Virus) का प्रभाव महज 10 फीसदी ही है, जबकि 90 प्रतिशत तौर पर वे पूरी तरह से सुरक्षित हैं।

गंगाजल पर इस बात की शोध बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में आईएमएस (IMS) की टीम ने की। उन्होंने गंगा नदी के किनारे रहने वाले लोगों पर कोरोना के प्रभाव पर शोध किया है। इसके लिए टीम ने पंचगंगा घाट पर 49 लोगों का सैंपल लिया था। सभी की बारीकी से जांच की गई तो इनमें से 48 लोग नेगेटिव पाए गए। जबकि सिर्फ एक व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव मिला। इससे पहले भदैनी, तुलसीघाट, हरिश्चंद्र घाट और चेतसिंह घाट पर करीब 54 लोगों की सैंपलिंग की गई थी। इस दौरान भी तब सभी लोगों की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। इस टीम में बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रामेश्वर चौरसिया, न्यूरोलाजिस्ट प्रो. वीएन मिश्रा प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। उनका कहना है कि व्यापक स्तर पर शोध के लिए गोमुख से लेकर गंगा सागर तक 100 स्थानों पर सैंपलिंग की गई थी। इस दौरान पाया गया कि जो लोग नियमित तौर पर गंगाजल का सेवन कर रहे थे उनमें 90 फीसदी लोगों पर कोरोना संक्रमण का असर नहीं था। इतना ही नहीं गंगा किनारे बसे लोगों की इम्यूनिटी ज्यादा मजबूत है। वे अन्य शहरों की तुलना में 50 फीसदी कम संक्रमित हैं।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रो. वीएन मिश्र ने बताया कि कोरोना मरीजों की फेज थेरेपी के लिए गंगाजल का नेजल स्प्रे भी तैयार करा लिया गया है। साथ ही इसकी डिटेल रिपोर्ट आईएमएस की इथिकल कमेटी को भेज दी गई। कमेटी से अप्रूवल मिलते ही ह्यूमन ट्रायल भी किया जाएगा। इसमें लगभग 250 लोगों को शामिल किया जाएगा। ट्रायल के दौरान चुने गए लोगों को दो भागों में बांटा जाएगा। आधे लोगों की नाक में गंगनानी से लाया गया गंगाजल डाला जाएगा। जबकि बाकी के आधे लोगों की नाक में प्लेन डिस्टिल वॉटर डाला जाएगा। इसके बाद जांच की जाएगी कि किन्हें ज्यादा फायदा है। इस रिसर्च के बाद गंगाजल का कोरोना को बेअसर करने का दावा पूरी तरह से सही साबित हो सकेगा।

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