आनंदपाल एनकाउंटर की कहानी, चश्मदीद की जुबानी

आनंदपाल एनकाउंटर की कहानी, चश्मदीद की जुबानी

पुलिस का कहना है कि उसने तो आनंदपाल को सरेंडर करने के लिए ही कहा था लेकिन वह गोलियां दागने लगा। सरेंडर के प्रयास नाकाम होते और उसे दनादन गोलियां दागते देख पुलिस को भी आखिरकार गोलियां चलानी पड़ी।

जयपुर। राजस्थान के पुलिस महकमे को आखिरकार सफलता मिली। एनकाउंटर में आनंदपाल के ढेर होने के बाद जहां गृहमंत्री ने उदयपुर में प्रेस कॉन्फरेंस के दौरान पुलिस की पीठ थपथपाई, वहीं जयपुर में आला अफसरों ने मीडिया के समक्ष पूरे ऑपरेशन का ब्यौरा रखा। आला अफसर रह-रहकर एसएमएस अस्पताल पहुंचते रहे, घायल सोहन सिंह से मिलते रहे। शाबासी दी, हौसला बढ़ाया और हरसम्भव मदद का भरोसा दिलाया। लेकिन, पुलिस और सरकार की सफलता की कहानी में सांवराद में हुए उत्पात ने कड़वाहट घोल दी। पुलिस का कहना है कि उसने तो आनंदपाल को सरेंडर करने के लिए ही कहा था लेकिन वह गोलियां दागने लगा। सरेंडर के प्रयास नाकाम होते और उसे दनादन गोलियां दागते देख पुलिस को भी आखिरकार गोलियां चलानी पड़ी। और... आनन्दपाल का आखिर अन्त हो गया। 
anandpal encounter के लिए चित्र परिणाम

अफसर जैसे ही सरेंडर की कहते, वह गोलियां बरसाने लगता
एसओजी और ईआरटी कमांडो कुख्यात आनंदपाल का एनकाउंटर नहीं करना चाहते थे। अधिकारियों ने शनिवार रात उससे बार-बार सरेंडर के लिए कहा, लेकिन वह कुछ नहीं बोला। जिधर से भी अधिकारी से उसे सरेण्डर करने की कहते, वह उधर ही गोली दागता। यह काफी देर तक चला। एसओजी टीम और एसपी चूरू उसे सरेण्डर करने की कहते रहे और वह गोलियां चलाता रहा। आनंदपाल मकान की पहली मंजिल पर बने कमरों से घूम-घूम कर गोलियां चला रहा था, जिससे पुलिस समझे कि वह अकेला नहीं, उसके साथ और भी लोग हैं। आखिरकार उसकी गोली से ईआरटी कमांडो सोहनसिंह जख्मी हो गया लेकिन सोहनसिंह की गोली का आनंदपाल ही शिकार हुआ। 
यह जुबानी है, ऑपरेशन आनंदपाल में शामिल ईआरटी कमांडो हनुमान सेवदा की। उसने बताया कि ऑपरेशन करीब 55 मिनट तक चला।
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कमांडो हनुमान सेवदा ने बताया गोलीबारी का आंखो देखा हाल

रात: 8:30  बजे
एसओजी एएसपी करन शर्मा के नेतृत्व में ईआरटी कमांडो और एसओजी टीम मालासर के पास पहुंची। एएसपी संजीव भटनागर के बताए श्रवण सिंह के मकान में आनंदपाल के पनाह लेने की जानकारी दी।

रात: 9:15 बजे
एएसपी और कमांडो की एक टीम मकान के पास पहुंची और रैकी की। ऑपरेशन आनंदपाल की रणनीति बनाई।

रात 10:00  बजे
एसओजी, ईआरटी कमांडो, चुरू पुलिस और हरियाणा पुलिस के अधिकारी और कमांंडो पहुंचे मालासर में श्रवण सिंह के मकान पर पहुंचे। 

कारों की ओट में पहुंचे मकान तक  
रात 10:05 बजे : ईआरटी कमांडो और एसओजी टीम ने मकान को घेर लिया। दस-दस कदम की दूरी पर कमांडो मुस्तैद हो गए।  
रात: 10:10 बजे : ईआरटी के नौ कमांडो और एसओजी के एएसपी करन शर्मा, इंस्पेक्टर सूर्यवीर, चूरू एसपी राहुल बारहट ने  कारों को ढाल बनाया। 

महिलाओं को बनाया ढाल
रात: 10:15 बजे : भनक लगते ही आनंदपाल पहली मंजिल से नीचे श्रवण सिंह के परिवार के पास आया। उसने परिवारजन को मकान के मुख्य दरवाजे पर बैठने के लिए कहा। महिलाएं दरवाजे पर बैठ गईं। आनंदपाल वापस ऊपर पहली मंजिल पर चला गया।

आनंद तुम घिर गए हो, सरेंडर कर दो
रात 10:30 बजे : कमांडो ने आनंदपाल से कहा कि वे घिर गया है। उसके भाई विक्की और गट्टू भी पकड़े जा चुके हैं। वह सरेंडर कर दे। टॉर्च के उजाले में आनंदपाल दिख गया।
रात 10:35 बजे : एसओजी और ईआरटी कमांडों ने मकान में मौजूद महिला और पुरुष से बाहर आने के लिए कहा। महिलाएं बोलीं, उन्हें परेशान मत करो, उनके बेटे की तबियत खराब है। यहां पर आनंदपाल नहीं है। 
रात: 10:40 बजे: एसओजी टीम और कमांडो ने महिला और पुरुष को एक कमरे में बंद कर दिया और फिर आनंदपाल को सरेंडर करने को कहा। 

आनंदपाल ने शुरू कर दी फायरिंग 
रात 10:42 बजे: आनंदपाल ने सरेंडर करने की बात पर फायरिंग शुरू कर दी। इससे एसओजी टीम ने मकान के कमरों की तलाशी ली। फिर एसओजी टीम और एसपी चूरू के साथ, कमांडो और अधिकारी आगे बढ़े। 
रात 10:50 बजे : कमांडो हनुमान और संदीप गोली से बच पीछे हटे। कमांडो सोहनसिंह ने आनंदपाल को देख लिया। तभी हरियाणा पुलिस के कमांडो ने आनंदपाल पर फायरिंग कर दी, उसके हाथ में गोली लगी। 

और ढेर हो गया आनंदपाल 
रात 10:55 बजे : एसपी चूरू और अन्य एसओजी अधिकारी आनंदपाल को सरेंडर करने की कहते रहे।  सोहन  सिंह  सीढि़या चढ़कर ऊपर पहुंचा था कि आनंदपाल  ने एके-47 से दनादन फायर कर दिया। तभी सोहन ने भी एके-४७ से फायर किया और आनंदपाल ढेर हो गया लेकिन आनंदपाल की गोली लगने से सोहन सिंह जख्मी हो गया। 
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