300 से ज्यादा कर्मचारी निकाले तो लेनी होगी सरकार की मंजूरी

Rahul Chauhan

Publish: Sep, 13 2017 08:53:46 (IST)

Miscellenous India
300 से ज्यादा कर्मचारी निकाले तो लेनी होगी सरकार की मंजूरी

इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड बिल में ट्रेड यूनियन एक्ट, इंडस्ट्रियल एम्प्लायमेंट एक्ट और इंडस्ट्रियस डिस्पियूट एक्ट को मर्ज किया जाएगा। 

धीरज कुमार
नई दिल्ली: फैक्ट्री खोलने, बंद करने या फिर हड़ताल की स्थिति में काम करने के लिए सरकार जल्दी ही मौजूदा नियम में बड़ा बदलाव करने जा रही है। दरअसल, मोदी सरकार इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड बिल लाने जा रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर बने मंत्रियों के समूह ने अपनी सिफारिशें तैयार कर ली है।

जल्द ही कैबिनेट के सामने रखी जाएंगी सिफारिशें
मंत्री समूह की सिफारिशों में कहा गया है कि किसी भी प्लांट, फैक्ट्री या फिर माइन सेक्टर में 100 की बजाय अब 300 से ज्यादा कर्मचारियों को निकालने के लिए सरकार की मंजूरी की जरूरत होगी। ये सिफारिशें जल्द ही कैबिनेट के सामने रखी जाएंगी। कैबिनेट में मंजूरी मिलने के बाद इसे बिल के रूप में सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में लाएगी।

इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड को कैबिनेट जल्द दे सकता है मंजूरी
हड़ताल करने के लिए 14 दिन का नोटिस देना जरूरी होगा। फैक्ट्री में हड़ताल खत्म नहीं होने पर मामला सीधे इंडस्ट्रियल रिलेशन बोर्ड के पास पहुंच जाएगा। जिसे 30 दिनों के अंदर आदेश पारित करना होगा। इस आदेश को दोनों पार्टियों को मानना होगा। सुपरवाइजर वर्कर की श्रेणी में नहीं आएंगे। साथ ही फैक्ट्री पर लगने वाली पेनल्टी की शर्तें भी आसान होंगी। इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड बिल में ट्रेड यूनियन एक्ट, इंडस्ट्रियल एम्प्लायमेंट एक्ट और इंडस्ट्रियस डिस्पियूट एक्ट को मर्ज किया जाएगा। इसका फायदा फैक्ट्री में काम करने वाले मजूदरों को भी होगा।

हड़ताल के लिए 14 दिन पहले देना होगा नोटिस
अभी तक हड़ताल का यह नियम आवश्यक सेवा वाली इकाइयों पर लागू होता था। मगर अब सरकारी हो या निजी, हर फैक्टरी इकाई में हड़ताल के लिए 14 दिन पहले नोटिस देना होगा। मजदूरों को निकाले जाने की स्थिति में काम के हरेक साल 45 दिनों का वेतन देना होगा। फैक्ट्री में कौशल विकास के लिए फंड भी स्थापित किया जाएगा। यूनियन 45 दिनों के अंदर पंजीकृत मानी जाएगी।

बाहरी व्यक्ति नहीं बन सकेंगे ट्रेड यूनियन का हिस्सा
बाहरी व्यक्ति ट्रेड यूनियन का हिस्सा नहीं बन सकेंगे। यानी ट्रेड यूनियन में अब कोई पूर्व कर्मचारी या अनुभवी व्यक्ति नहीं रह सकता। मौजूदा कर्मचारी ही ट्रेड यूनियन का हिस्सा बन सकेगा।

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