चीनी निर्यात की समय सीमा दिसंबर तक बढ़ाने के साथ दी सब्सिडी, गन्ना किसानों को जल्द मिलेगा बकाया भुगतान

  • Sugar Export : कोरोना महामारी के दौरान ट्रांसपोर्टेशन के पर्याप्त संसाधन न होने एवं अन्य कारणों से समय पर नहीं हो सका चीनी का एक्सपोर्ट
  • सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में 60 लाख टन चीनी के निर्यात की मंजूरी दी है

By: Soma Roy

Published: 29 Sep 2020, 02:49 PM IST

नई दिल्ली। गन्ना किसानों (Sugarcane Farmers) को राहत देने और चीनी के निर्यात को लेकर सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। सरकार ने चीनी मिलों को इस साल के लिए चीनी के अनिवार्य निर्यात (Mandatory Export of Sugar) की समयसीमा तीन महीने बढ़ा दी है। पहले इसकी अवधि सितंबर तक थी, लेकिन कोरोना महामारी के चलते ट्रांसपोर्टेशन समेत अन्य चीजों में हो रही दिक्कत के चलते दिसंबर तक बढ़ा दी है। ऐसे में चीनी मिलें (Sugar Mills) स्टॉक में रखे माल को जल्द ही एक्सपोर्ट कर सकेंगे। सरकार ने चीनी निर्यात के लिए 6,268 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी है। इससे गन्ना किसानों को लाभ मिलेगा। सही समय पर मिलों को सब्सिडी मिलने से किसानों को उनका पेमेंट समय से मिल जाएगा।

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केंद्र सरकार ने 2019-20 के लिए कोटे के तहत 60 लाख टन चीनी के निर्यात (Sugar Export) की मंजूरी दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खाद्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने बताया कि 60 में से 57 लाख टन चीनी का अनुबंध (Contract) हो गया है। शुगर मिलों से करीब 56 लाख टन चीनी निकल चुकी हैं। बाकी कुछ मिलों में स्टॉक रखा है जिसे जल्द ही एक्सपोर्ट किया जाएगा। चीनी मिलों ने ईरान, इंडोनेशिया, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश को चीनी का निर्यात किया है। चीनी के निर्यात पर सब्सिडी देने से अतिरिक्त घरेलू स्टॉक को खत्म किया जा सकेगा। साथ ही किसानों के बकाया भुगतान में चीनी मिलों को आसानी होगी।

खाद्य मंत्रालय के अनुसार निर्यात समय सीमा बढ़ाने का मकसद चीनी मिल मालिकों को कोरोना महामारी के चलते हुई परेशानियों से राहत दिलाना और गन्ना किसानों को समय पर भुगतान हो सके इस बात को सुनिश्चित करना है। सरकार के पास कई ऐसे प्रार्थना पत्र मिले जिनमें बताया गया कि कैसे ट्रांसपोर्टेशन की पर्याप्त व्यवस्था न होने और लॉजिस्टिक कारणों के चलते एक्सपोर्ट का काम समय पर नहीं हो सका है। इन्हीं सबके आधार पर निर्यात सीमा को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

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