Coronavirus के खौफ से घरों में ही मनेगी EID 2020, जानिए घर पर रह कर कैसे करें इबादत

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-कोरोना महामारी के बीच पड़ी इस ईद (eid al fitr in lockdown) पर लोगों में उत्साह देखने को नहीं मिल रहा है

-ईद-उल-फितर (Eid-ul-Fitr) का त्योहार शांतिपूर्ण मनाने के लिए पुलिस और प्रशासन ( Police in Lockdown) अधिकारियों ने लोगों से लॉकडाउन के नियमों का पालन कर ईद मनाने की अपील की है

नई दिल्ली. EID 2020 देश में पहली बार लॉकडाउन (Lockdown ) की वजह से ईद (EID 2020) का त्योहार फीका रहेगा। इस मौके पर जश्न नहीं मनेगा। शारीरिक दूरी का पालन (Social distancing) करने की वजह से लोग एक-दूसरे को गले लग कर ईद की मुबारकबाद नहीं दे पाएंगे। यही नहीं, एक-दूसरे के घर जाकर सेवइयों का भी लोग मजा नहीं ले पाएंगे। इस तरह, इतिहास में ये पहली ईद होगी जो सादगी से मनाई जाएगी। कोरोना महामारी के बीच पड़ी इस ईद (eid al fitr in lockdown) पर लोगों में उत्साह देखने को नहीं मिल रहा है। वहीं लॉकडाउन के चलते ईद-उल-फितर (Eid-ul-Fitr) का त्योहार शांतिपूर्ण मनाने के लिए पुलिस और प्रशासन ( Police in Lockdown) अधिकारियों ने लोगों से लॉकडाउन के नियमों का पालन कर ईद मनाने की अपील की है। आइए जानते हैं घर कैसे करें इबादत..


-ऐसा नहीं है कि घर पर जुमे की नमाज नहीं पढ़ी जा सकती है, लेकिन दिक्कत ये है कि जुमे की नमाज के लिए जो शर्तें हैं उसे घर पर पूरा करना जरा मुश्किल है। बड़ी शर्त ये है कि नमाज के लिए खुली जगह होनी चाहिए यानि बंद घर में जुमे की नमाज नहीं हो सकती है।

-जुमे की नमाज में खुतबा दिया जाता है, खुतबा हर मुसलमानों को याद नहीं होता या वो नहीं दे पाते ऐसे में जुमे की नमाज घर पर पढ़ने में परेशानी होती है, लेकिन अगर कोई भी इन मुख्य दो शर्तों (कम से कम चार लोगों का होना, खुतबा याद हो) को पूरा करता है तो अपने घर पर जुमे की नामाज पढ़ सकता है।

-इस दिन कई तरह के पकवान घर में बनाएं जाते हैं। वहीं, मीठी सेवइयां घर पर आए मेहमानों को खिलाया जाता है। वहीं आप घर पर ही तरह तरह के पकवान बनाकर अपनी परिवार संग मिलकर मना सकते हैं।

-गले न मिलकर फोन कर या वाट्सएप पर ही ईद की मुबारकबाद दें सकते हैं। वहीं, सरकार द्वारा जारी की गई गाइडलाइन का पालन करना होगा।


गौरतलब है कि अलविदा रमजान के आखिरी अशरे (21, 23, 25, 27, 29) में पड़ता है। रमजान के आखिरी जुमे को सैय्यदुल अय्याम कहा जाता है। ये सभी दिनों से अफजल होता है। जाहिर बात है जब ऐसा मौका मुसलमानों के बीच से रुखसत हो रहा हो तो उनका गमगीन होना लाजिमी है। इसलिए अलविदा के मौके पर मुसलामन नमाज में अल्लाह से अगला रमजान पाने की इच्छा जताते हैं। फिलहाल लॉकडाउन के कारण मस्जिदों में सामूहिक इबादत की मनाही है।

Ruchi Sharma
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