सरकारी किताब में भगत सिंह को बताया आतंकी, अभी तक नहीं मिला शहीद का दर्जा

सरकारी किताब में भगत सिंह को बताया आतंकी, अभी तक नहीं मिला शहीद का दर्जा

आज आप खुलेआम अपनी छाती चौड़ी करके देशभर में ही नहीं बल्कि विश्व के किसी भी कोने में घूम सकते हैं।

नई दिल्ली। आज आप खुलेआम अपनी छाती चौड़ी करके देशभर में ही नहीं बल्कि विश्व के किसी भी कोने में घूम सकते हैं। इसके पीछे की वजह आप भलि-भांति जानते ही होंगे। कि आज से 70 साल पहले हमें अंग्रेज़ों के आंतक और अत्याचारों से आज़ादी मिल गई थी। वैसे तो इस आज़ादी को दिलाने में देशभर के हज़ारों लोगों ने अपनी जान की बाज़ी लगा दी थी। लेकिन फिर भी सबसे ऊपर आने वाले नामों में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु शामिल रहते हैं। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यही है कि इन्होंने अपनी जवानी की शुरुआत में ही देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे।

लेकिन जो बात हम आपको बताने जा रहे हैं, उसे सुनने के बाद आपका खून खौल उठेगा। आप तो जानते ही होंगे कि आज़ादी के बाद से अब तक कई बार सत्ता की बागडोर कांग्रेस संभालती आई है। इसके अलावा बीजेपी को भी देश की सरकार चलाने का मौका मिल चुका है और वर्तमान में सत्ता की ताकत बीजेपी के हाथों में ही है। लेकिन अफसोस की बात है कि देश की आज़ादी के लिए अपनी जवानी तक त्याग देने वाले स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु अभी तक आधिकारिक तौर पर शहीद नहीं माने गए हैं।

देश की सत्ता में कई बार पावर में रह चुकी कांग्रेस और खुद को राष्ट्रवादी पार्टी बताने वाली बीजेपी ने भी अभी तक इन सेनानियों को शहीद का दर्जा नहीं दिया है। बता दें कि इस पूरी सच्चाई का खुलासा एक आरटीआई में हुआ है। यह आरटीआई जम्मू के रहने वाले रोहित चौधरी ने डाला था। जानकारी के अनुसार यह आरटीआई भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (ICHR) में दाखिल कराई गई थी। आरटीआई से एक खून खौला देने वाली ये बात भी सामने आई थी कि ICHR ने नवंबर में एक बुक लॉन्च की थी। उस बुक में भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव जैसे स्वतंत्रता सेनानी को कट्टर युवा और आतंकी बताया गया था।

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