भारत में अब ठीक हुए मरीजों के खून से होगा कोरोना का इलाज ! केरल में ट्रायल शुरू

  • केरल देश का पहला राज्य होगा जहां कोरोना ( Coronavirus ) संक्रमण मरीजों के इलाज के लिए प्लाज्मा थैरेपी ( Plasma Therapy in India ) का ट्रायल किया जाएगा।
  • इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ( ICMR ) ने केरल सरकार को अनुमति दे दी है।
  • केरल के श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी के पहले प्रोजेक्ट के लिए आईसीएमआर ने सहमती दे दी है।
  • विशेषज्ञों और डॉक्टरों के अनुसार एक व्यक्ति के प्लाज्मा से 3 मरीजों का इलाज किया जा सकता हैं।

नई दिल्ली।
भारत में पहली बार अब कोरोना ( Coronavirus ) से जंग जीत चुके लोगों के खून से कोरोना ( COVID-19 Patients ) संक्रमित लोगों का इलाज किया जाएगा। देश में पहली बार केरल में इसका ट्रायल किया जा रहा है। बता दें कि केरल देश का पहला राज्य होगा जहां कोरोना संक्रमण मरीजों के इलाज के लिए प्लाज्मा थैरेपी ( Plasma Therapy in India ) का ट्रायल किया जाएगा। इस थैरेपी में ठीक हुए मरीजों के खून की एंटीबॉडीज का इस्तेमाल किया जाता है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ( ICMR ) ने केरल सरकार को अनुमति दे दी है। बता दें कि केरल के श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी के पहले प्रोजेक्ट के लिए आईसीएमआर ने सहमती दे दी है।

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देश का पहला राज्य होगा केरल ( Clinical trial of Plasma Therapy )
इंस्ट्रीट्यूट की निर्देशक डॉ. आशा किशोर ने कहा, हमें आईसीएमआर से इसे क्लीनिकल ट्रायल के लिए अनुमति मिली है। अप्रैल के आखिरी महीने तक इस पर काम शुरू किया जाएगा। हालांकि, अभी ड्रग्स कंट्रोलर ऑफ इंडिया और एथिक्स कमेटी से इसके लिए अनुमति ली जा रही है। बता दें कि केरल ( coronavirus s in Kerala ) देश का पहला राज्य होगा जहां प्लाज्मा थैरेपी के जरिए कोरोना मरीजों का इलाज किया जाएगा।

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प्लाज्मा थैरेपी से ठीक होने का दावा
बता दें कि प्लाज्मा थैरेपी से कई मरीजों का सफर इलाज का दावा किया जा रहा है। अमेरिका में ठीक हो चुके मरीजों के रक्त से प्लाज्मा निकालकर बीमार रोगियों को ठीक करने के लिए दिया जा रहा है। अमेरिका और इंग्लैंड में इसे लेकर ट्रायल शुरू हो चुके हैं।

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3 मरीज हो सकते हैं ठीक
विशेषज्ञों और डॉक्टरों के अनुसार एक व्यक्ति के प्लाज्मा से 3 मरीजों का इलाज किया जा सकता हैं। इससे डोनर को कोई खतरा नहीं होता। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना से लड़ने के लिए शरीर में पर्याप्त एंटीबॉडीज बनती रहती है।

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