India-China Standoff: अगले सप्ताह आठवें दौर की सैन्य कमांडर चर्चा की तैयारी

  • भारत-चीन ( India-China standoff ) सैन्य कमांडरों की अगले सप्ताह 8वें दौर की वार्ता की तैयारी।
  • सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्ष टकराव वाले इलाकों का हल निकालने में नहीं दिखा रहे तेजी।
  • चीन चाहे भारत पीछे करे बख्तरबंद और तोपखाने, लेकिन भारत जोखिम के लिए तैयार नहीं।

नई दिल्ली। भारत-चीन के बीच जारी सीमा विवाद ( India-China standoff ) के बीच सेनाओं को पीछे करने को लेकर दोनों पक्षों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर की बातचीत का आठवां दौर अगले सप्ताह तक लद्दाख में होने की उम्मीद है। दरअसल दोनों देशों की सेनाएं 1,597 किमी लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बर्फ और सर्दियों में तैनाती के लिए तैयार हैं।

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वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक दोनों पक्ष टकराव वाले इलाकों का कोई हल निकालने के लिए तत्पर नजर नहीं आ रहे हैं, लेकिन उन्होंने सैन्य कमांडर और राजनयिक दोनों स्तरों पर संवाद को खुला रखने का फैसला किया है। यह वार्ता किसी भी दुर्घटना या किसी कमांडर की आक्रामकता के चलते टकराव वाले इलाकों पर सैन्य वृद्धि को रोकने के उद्देश्य से की जानी हैं।

जहां पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने प्रस्ताव दिया है कि दोनों पक्ष बख्तरबंद और तोपखाने को पहले पीछे ले जाएं और फिर सेना को वापस लें, भारतीय पक्ष इस पर बहुत स्पष्ट है कि बख्तरबंद इकाइयों को वापस नहीं लिया जा सकता है क्योंकि यह इलाके और क्षमता के चलते चीन को लाभ दे सकता

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एक वरिष्ठ सैन्य कमांडर ने समझाया कि मुद्दा यह है कि पैंगोंग त्सो के उत्तर और दक्षिण दोनों किनारों पर भारतीय सेना का दृष्टिकोण दो बहुत ऊंचे पहाड़ी दर्रों से होकर गुजरता है। इनमें 17,590 फीट की ऊंचाई पर चांग ला और 18,314 फीट पर मार्सिमिक ला है।

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उन्होंने आगे कहा कि जहां चांग ला, लेह से पैंगोंग त्सो के विवादास्पद दक्षिणी तट के बीच स्थित है, मार्सिमिक ला, पैंगोंग झील के विवादास्पद उत्तरी तट और कोंका ला के बीच स्थित है। कोंका-ला के पास विवादास्पद गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स से जाने वाली सड़क पैंगोंग त्सो के उत्तर से मार्सिमिक ला तक जाती है।

उन्होंने बताया, "अगर भारत को चांग ला से आगे या मार्सिमिक ला से आगे पैंगोंग त्सो के दक्षिण से अपनी बख्तरबंद इकाइयां वापस लेनी थीं, तो वे कभी भी सबसे खराब स्थिति में इन विवादास्पद बिंदुओं तक नहीं पहुंचेंगे, क्योंकि हर साल अप्रैल तक भारी बर्फ से दोनों मार्ग अवरुद्ध हो जाते हैं। दूसरी ओर पीएलए को एक फायदा यह है कि उनके पास मार्सिमिक ला और कोंका ला दोनों से केवल 10 किमी दूर छह लेन का काशगर-ल्हासा राजमार्ग है, जो सीधे उनकी पोस्ट तक जाता है।"

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पीएलए ने इस साल अप्रैल-मई में गलवान घाटी, गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स और पैंगोंग त्सो के उत्तरी किनारे पर आक्रमण शुरू किया, जबकि भारतीय सेना ने अगस्त के अंतिम सप्ताह में पहले से ही रेजांग ला-रेचिन ला रिजलाइन पर कब्जा करने के लिए पैंगोंग त्सो के दक्षिण में अपनी चाल चलते हुए जगह बना ली।

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स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है क्योंकि अक्साई चिन के साथ-साथ चेंग्दू और काशगर तक के गहन क्षेत्रों में पीएलए पूरी तरह से तैनात है। PLA की वायु सेना अपने लड़ाकू गश्ती दल के साथ आस-पास के एयरबेस के सक्रिय होने का सिलसिला जारी रखे हुए है।

परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय सेना और पीएलए को विवादास्पद बिंदुओं पर तैनात किया गया है और दूरी बनाए रखी गई है ताकि किसी दुर्घटना की संभावना से बचा जा सके। भारतीय मेडिकल फैसिलिटीज एलएसी पर आ गई हैं ताकि बेहद-ऊंचाई की बीमारी के शिकार लोगों को तत्काल उपचार मिल सके और उन्हें पर्तापुर के विशेष हंडर अस्पताल में पहुंचाने के लिए एयर-लिफ्ट का इंतजार न करना पड़े।

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अमित कुमार बाजपेयी
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