2+2 वार्ता: भारत होगा गैर-नाटो का पहला ऐसा देश जो करेगा अमरीकी तकनीक और हथियारों का इस्तेमाल

टू प्लस टू वार्ता में भारत और अमरीका के बीच नए युग की शुरूआत हुई है। वार्ता के दौरान हुए समझौते के तहत भारत को काफी मिलने जा रही है।

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Published: 06 Sep 2018, 05:27 PM IST

नई दिल्लीः भारत और अमरीका के बीच गुरुवार को पहली बार टू प्लस टू वार्ता हुई। इस वार्ता में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण अपने अमरीकी समकक्ष माइक पॉम्पियो और जेम्स मैटिस के साथ बैठक की। मीटिंग में आतंकवाद, व्यापार और आपसी सुरक्षा समेत कई अहम मुद्दे पर चर्चा हुई। दोनों देशों के मंत्रियों की बैठक में पाकिस्तान की तरफ से प्रायोजित आतंकवाद पर भी चर्चा हुई और आतंकवाद की कड़ी निंदा की गई। वार्ता के बाद दोनों देशों की तरफ से संयुक्त बयान जारी हुए।

अमरीकी तकनीक का इस्तेमाल कर सकेगा भारत

टू प्लस टू वार्ता के दौरान कॉमसीएएसए(COMCASA) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत अमरीका संवेदनशील सुरक्षा तकनीक भारत को बेच सकेगा। इस समझौते के बाद अब भारत अमरीकी तकनीक और हथियारों का इस्तेमाल कर सकेगा। सबसे खास बात यह है कि गैर-नाटो का भारत ऐसा पहला देश होगा जिसे अमरीका की तरफ से इतनी बड़ी सुविधा मिलने जा रही है। इसके अलावा भारत-अमरीका ने आपसी हितों से जुड़े कई अहम समझौते किए हैं जिससे दोनों देश के रिश्ते और मजबूत होंगे। बैठक में यह भी तय हुआ है कि दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ेगे। इसके अलावा समुद्र और आकाश में आने-जाने की स्वतंत्रता पर बल दिया जाएगा।

इन मुद्दों पर भी हई चर्चा

वार्ता के दौरान सुषमा स्वराज ने कि भारत अमरीका की अफगान नीति का समर्थन करता है और दक्षिण एशियाई क्षेत्र में अमरीकी नीति भारतीय नीति से काफी मेल खाती है। भारत ने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद रोकने का अमरीकी फैसला सराहनीय कदम है। उधर, अमरीका की तरफ से कहा गया कि एनएसजी में भारत की सदस्यता के लिए हरसंभव कोशिश की जाएगी। बैठक के बाद सुषमा स्वराज ने कहा कि 26/11 हमले में दोषियों को सजा दिलाने के लिए दोनों देश एकमत हुए हैं।

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