China की हर हरकत पर नजर रख रहा भारत, LAC पर सेना ने तैनात की स्पेशल माउंटेन फोर्स

  • India China Tenison के बीच Indian Army ने तैनात की Special Mountain Force
  • 3,488 किमी लंबी LAC के चप्पे पर रखी जा रही पैनी नजर
  • China के हर तरह के हमले की तैयार है India Army

नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच ( India China Tenison ) गलवान घाटी में हुई हिंसक झपड़ ( Galwan Valley ) के बीच भारतीय सेना ने 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा ( LAC ) के साथ अपने विशिष्ट उच्च ऊंचाई वाले युद्धक बलों को तैनात किया है, जो कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ( PLA ) की ओर से पश्चिमी, मध्य या पूर्वी क्षेत्रों में किसी भी तरह के हमले के लिए तैयार है।

शीर्ष सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारतीय सेना को PLA की ओर से किसी भी सीमा पार से आक्रामकता से एलएसी की रक्षा करने के लिए निर्देशित किया गया है। ये माउंटेन फोर्स चीन की हर हरकत पर अपनी पैनी नजर रख रही है।

भारतीय पर्वतीय सैनिकों को गुरिल्ला युद्ध में प्रशिक्षित किया जाता है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में युद्ध को जीतकर भारतीय सेना ने ये साबित भी किया है। यही वजह है कि भारतीय सेना ने चीन की LAC पर हर हरकत पर नजर रखने के लिए स्पेशल ट्रेन्ड माउंटेन फोर्स तैनात की गई है।

कांग्रेस के दिग्गज नेता नवजोत सिंह सिद्धू हुए गायब, चार दिन से तलाश रही पुलिस, नहीं लगा कोई पता

65-2-960x540.jpg

अनलॉक-1 के बीच मोदी सरकार का सबसे बड़ा फैसला, इन चीजों पर जारी रहेगी पाबंदी

चीन में Huang Guozhi (हुआंग गुओज़ी) नाम के रक्षा विशेषज्ञ ने हाल में एक डिफेंस मैगजीन में एक लेख लिया था। इस लेख का सार ये है कि पहाड़ों पर लड़ने की जो क्षमता भारतीय सेना के पास है, वैसी क्षमता ना अमरीका के पास है, ना रूस के पास है और ना ही यूरोप के किसी देश के पास है।

इस लेख में कहा गया है कि भारत की माउंटेन फोर्स दुनिया में सबसे बड़ी है और इसमें 2 लाख से ज्यादा सैनिक हैं, इतने सैनिक दुनिया की किसी माउंटेन फोर्स के पास नहीं हैं।

चीन के इस रक्षा विशेषज्ञ ने लिखा था कि पहाड़ों पर लड़ने की इसी काबीलियत के दम पर भारत ने पाकिस्तान को 1984 में सियाचिन में और 1999 में कारगिल में हराया था।

भारतीय सेना के हथियारों की भी बात की गई है और ये कहा गया कि भारत ने हाल के वर्षों में अमरीका से जो हथियार खरीदे, उससे भारत की ताकत और बढ़ गई है।

इसमें M-777 अल्ट्रा लाइट होवित्जर तोप, Apache अटैक हेलीकॉप्टर और Chinook हैवी ट्रांसपोर्ट हेलीकॉप्टर का जिक्र किया गया है।

"पहाड़ पर लड़ने की कला सबसे कठिन है क्योंकि मानव हताहतों की संख्या 10 है जो उनकी ऊंचाई पर बैठी हुई सेना की प्रत्येक टुकड़ी के लिए है।

उत्तराखंड, लद्दाख, गोरखा, अरुणाचल और सिक्किम के सैनिकों ने सदियों से दुर्लभ ऊंचाइयों को अपना लिया है और इसलिए उनकी लड़ने की क्षमता जबरदस्त है। भारतीय सेना के एक पूर्व प्रमुख ने कहा कि तोपखाने और मिसाइलों की पिन-पॉइंट सटीकता है या फिर वे पहाड़ के निशाने को मीलों दूर से लगा लेते हैं।

सेना के लिए दूसरी फायदेमंद बात यह है कि तिब्बती पठार चीनी तरफ समतल है जबकि भारतीय पक्ष काराकोरम में K2 चोटी से शुरू होता है। यानी ऊंचाई पर है जो लड़ाई में फायदेमंद है।

उत्तराखंड में नंदादेवी तक, सिक्किम में कंचनजंग और अरुणाचल प्रदेश सीमा के नामचे बरवा तक हर जगह सेना ऊंचाई पर है।

साउथ ब्लॉक वाले चीन के एक विशेषज्ञ ने कहा, "पहाड़ों में, न केवल क्षेत्र पर कब्जा करना मुश्किल है, बल्कि इस तक पहुंचा भी मुश्किल है।

धीरज शर्मा
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned