Vagir Submarine : जानें कितनी खतरनाक है भारतीय नौसेना में शामिल हुई 'वजीर' पनडुब्बी ?

  • 'वजीर' पनडुब्बी (submarine Vagir) भारत में बन रहीं छह कालवेरी श्रेणी की पनडुब्बियों का हिस्सा है
  • 'वजीर' पनडुब्बी को फ्रांसीसी समुद्री रक्षा और ऊर्जा कंपनी डीसीएनएस ने डिजाइन किया है

नई दिल्ली। स्कॉर्पीन श्रेणी की 5वीं पनडुब्बी 'वजीर' (Scorpene class submarine Vagir) नौसेना में शामिल हो गई है। इस नई पनडुब्बी के आने के बाद अरब सागर में भारत की ताकत और बढ़ गई है। आज यानी 12 नवंबर को 'वजीर' को दक्षिण मुंबई स्थित मझगांव गोदी में जलावतरण किया गया है। रक्षा राज्यमंत्री श्रीपद नाइक की पत्नी विजया ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये इसका जलावतरण किया।

भारतीय नौसेना की महिला पायलटों का पहला बैच तैयार, हौसला है दमदार: Video

आधुनिक प्रौद्योगिकी से है लैस

'वजीर' पनडुब्बी भारत में बन रहीं छह कालवेरी श्रेणी की पनडुब्बियों का हिस्सा है। इस पनडुब्बी को फ्रांसीसी समुद्री रक्षा और ऊर्जा कंपनी डीसीएनएस ने डिजाइन किया है। इसमें में कई नई तकनीक को जोड़ा गया है। सबसे खास बात ये है कि इसमें दुश्मन के रडार से बचने और आधुनिक प्रौद्योगिकी लैस है।

 

बेहद खतरनाक है वजीर

भारतीय नौसेना के एक अधिकारी ने बताया कि 'वजीर' ,पनडुब्बी रोधी युद्ध में कारगर होने, खुफिया जानकारी जुटाने, समुद्र में बारूदी सुरंग बिछाने, इलाके में निगरानी करने के साथ-साथ सतह पर भी जंग लड़ने में सक्षम है। इसके साथ ही रडार से बचने का के लिए इसमें आधुनिकतम प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया गया है। इसमें आधुनिक ध्वनि को सोखने वाली तकनीक भी है। इतना ही नहीं ये कम आवाज के साथ पानी में तेज गति से चल सकती है। सबसे अच्छी बात इसमें दुश्मन पर सटीक निर्देशित हथियारों से हमले की भी क्षमता है।'

रफाल के बाद भारत आ सकता है F-18 फाइटर, अमरीका ने दिया प्रस्ताव

अन्य पनडुब्बियों से कोई मुकाबला ही नहीं

मझगांव डॉक शिपबिल्डिंग लिमिटेड (MDL) के की तरफ से जारी एक बयान में बताया गया कि 'स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का निर्माण उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था । MDLने कहा कि यह पनडुब्बी टॉरपीडो से हमला करने के साथ और ट्यूब से लांच की जाने वाली पोत रोधी मिसाइलों को पानी के अंदर और सतह से छोड़ सकती है। एमडीएल के मुताबिक, इसका अन्य पनडुब्बियों से कोई मुकाबला ही नहीं है। ये हर मामले में बेहतर है। इसे पनडुब्बी को नौसेना की सभी तरह की जरूरतों और अभियानों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

साल 1973 में आई थी पहली वजीर

बता दें इस पनडुब्बी का नाम हिंद महासागर की शिकारी मछली 'वजीर' के नाम पर रखा गया है। इस खेप की पहली पनडुब्बी 3 दिसंबर 1973 को भारतीय नौसेना में शामिल हुई थी।

 

 

Vivhav Shukla
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned