वंदे मातरम एक्सप्रेस का किराया हुआ घोषित, 15 फरवरी को पीएम मोदी ट्रेन को दिखाएंगे हरी झंडी

वंदे मातरम एक्सप्रेस का किराया हुआ घोषित, 15 फरवरी को पीएम मोदी ट्रेन को दिखाएंगे हरी झंडी

Kapil Tiwari | Publish: Feb, 11 2019 09:26:35 PM (IST) | Updated: Feb, 11 2019 09:26:36 PM (IST) इंडिया की अन्‍य खबरें

वंदे मातरम एक्सप्रेस दिल्ली से वाराणसी के बीच चलेगी। अभी तक इसका ट्रायल जारी था।

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे की तरफ से सोमवार को देश की सबसे तेज ट्रेनों में गिनी जाने वाली वंदे मातरम एक्सप्रेस का किराया घोषित कर दिया। दिल्ली से वाराणसी के बीच दौड़ने वाली इस ट्रेन का किराया शताब्दी के मुकाबले काफी ज्यादा होगा, जबकि दोनों ट्रेनें एक ही रूट पर दौड़ेंगी, लेकिन वंदे मातरम एक्सप्रेस में पूरा विमान वाला फील होगा।

ये होगा वंदे मातरम एक्सप्रेस का किराया

वंदे मातरम एक्सप्रेस (ट्रेन 18) में एसी चेयर का किराया 1850 रुपए होगा, जबकि एग्जीक्यूटिव क्लास का किराया 3520 रुपए होगा। इस किराए में केटरिंग सेवा का शुक्ल भी शामिल रहेगा। इसके अलावा नॉन एसी चेयर कार का टिकट 1795 का होगा, जबकि नॉन एसी एग्जक्यूटिव क्लास का किराया 3470 रुपए होगा।

शताब्दी के डेढ़ गुना अधिक होगा किराया

यानी इस ट्रेन में चेयर कार के टिकट (समान रूट पर) का दाम शताब्दी से लगभग डेढ़ गुणा अधिक हैं। वहीं, इसके एग्जिक्यूटिव क्लास का किराया शताब्दी के फर्स्ट क्लास से करीब 1.4 गुणा अधिक है।

15 फरवरी को पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 फरवरी को वंदे मातरम एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे। अभी तक गाड़ी का ट्रायल चल रहा था। ट्रेन में दो प्रकार के ही क्लास हैं। पहला- एग्जिक्यूटिव और दूसरा- चेयर कार।

क्या खासियत हैं ट्रेन में

- नई दिल्ली से काशी के सफर पर एग्जिक्यूटिव क्लास में सुबह की चाय-नाश्ते और लंच के लिए 399 रुपए लिए जाएंगे। वहीं, इसी रूट पर चेयर कार श्रेणी के यात्रियों को इस सेवा के लिए 344 रुपए देने होंगे।

- नई दिल्ली से कानपुर और प्रयागराज जाने वाले यात्रियों को एग्जिक्यूटिव व चेयर क्लास के लिए क्रमशः 155 और 122 रुपए चुकाने होंगे।

- वाराणसी से नई दिल्ली तक के सफर पर यात्रियों से इस सुविधा के लिए 349 (एग्जिक्यूटिव) और 288 रुपए (एसी चेयर कार) लिए जाएंगे

- आपको बता दें कि इस ट्रेन का निर्माण मेक-इन-इंडिया पहल के तहत 97 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है। चेन्नई के इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में इसे बनाने में 18 महीने लगे हैं।

- वंदे भारत एक्सप्रेस से पहले शताब्दी देश की तीसरी सबसे तेज रफ्तार वाली ट्रेन थी। नई गाड़ी सफर में लगने वाले समय को लगभग 15 फीसदी कम कर देगी। भारतीय रेल अब ट्रेन 20 पर काम करने की योजना बना रहा है।

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