Unlock 1.0 होते ही प्रवासी मजदूरों के लौटने का सिलसिला शुरू, Flight और AC ट्रेनों के भेजे जा रहे टिकट

  • Unlock 1.0: धीरे-धीरे वापस लौट रहे हैं प्रवासी मजदूर ( Migrant Labourers )
  • Punjab में बसों से 40 मजदूरों की वापसी
  • प्रवासी मजदूरों को वापस आने के लिए भेजे जा रहे प्लेन और AC ट्रेनों के टिकट

नई दिल्ली। कोरोना वायरस (coronavirus ) के कारण देश में लॉकडाउन ( Lockdown 5.0 ) लागू है। एक जून से लॉकडाउन 5.0 ( Lockdown 5.0 ) का आगाज हो चुका है। लॉकडाउन पार्ट- 5.0 को अनलॉकड 1.0 ( Unlock 1.0 ) माना जा रहा है, क्योंकि केन्द्र सरकार ( Central Government ) ने धीरे-धीरे देश को दोबारा खोलने का ऐलान कर दिया है। वहीं, लॉकडाउन में जो प्रवासी मजदूर ( Migrant Labourers ) पैदल, साइकिल, रिक्शा, ऑटो से अपने घरों के लिए पलायन किए थे। वे अब धीरे-धीरे एक बार फिर शहरों की ओर लौटने लगे ( Migrant Labourers Back To Work ) हैं। लेकिन, इस बार प्रवासियों को शहर वापस लाने के लिए प्लेन ( Flight ) और एसी ट्रेनों ( AC Trains ) के टिकट भेजे जा रहे हैं। हालांकि, कुछ प्रवासी मजदूर ऐसे भी हैं जो दोबारा शहर की ओर नहीं लौटना चाहते हैं।

पंजाब में लौटे 40 मजदूर

एक रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार ( Bihar ), उत्तर प्रदेश ( Uttar Pradesh ), पश्चिम बंगाल ( West Bengal ), ओडिशा ( Odisha ), झारखंड ( Jharkhand ) के रहने वाले प्रवासी अब धीर-धीरे दोबारा काम पर लौटने लगे हैं। पंजाब ( Punjab ) में कृषि का काम दोबारा शुरू हो गया है। लिहाजा, यहां अब मजदूर वापस लौटने लगे हैं। वहीं, इंस्ट्रीज का भी काम शुरू हो गया है। लिहाजा, मजदूरों को वापस लाने के लिए फ्लाइट और एसी ट्रेनों के टिकट भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के बरानाल जिले में लाखोवाल ने मजदूरों की वापसी के लिए दो स्पेशल बसों को इंतजाम किया है। इन दो बसों से 40 मजदूर काम पर लौट चुके हैं। आश्चर्य की बात ये है कि इन मजदूरों का फूल-मालाओं से स्वागत किया जा रहा है।

प्रवासी मजदूरों की वापसी पर 1.85 लाख का खर्च

भारती किसान यूनियस ( लाखोवाल ) के अध्यक्ष जगसीर सिंह ( Jagseer Singh ) ने बताया कि जो मजदूर ( Workers ) वापस लौटे हैं, वे उत्तर प्रदेश के पीलीभीत ( Pilibhit ) और बिहार के मोतिहारी ( Motihari ) के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि इन मजदूरों को वापस लाने के लिए 1.85 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। अध्यक्ष का कहना है इस खर्च का आधा भार मजदूर उठाएंगे। जगसीर सिंह ने बताया कि अभी यूपी और बिहार से मजदूरों को लाने के लिए 75 और बसें भेजी जाएंगी। इस बाबत जिला प्रशासन से इजाजत ले ली गई है। बाहादुरके डाईंग एसोसिएशन के अध्यक्ष तरुण बावा जैन का कहना है कि हमारे यहां कुल 40 हजार मजदूर काम करते हैं, इनमें अभी 10 हजार ही काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो मजदूर वापस आने चाहते हैं, उनके लिए हम वापस आने का इंतजाम करेंगे। जैन ने कहा कि कई मजदूर वापस आना चाहते हैं, उन्होंने उम्मीद जताई कि 10 दिनों में मजदूर काम पर लौट आएंगे। इन सभी मजदूरों को पहले क्वरांटाइन किया गया है और उनका कोरोना टेस्ट भी होगा।

मध्य प्रदेश से भी मजदूरों की वापसी

रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के करीब 4500 मजदूर गुजरात के 14 अलग अलग जिलों में काम करते हैं। पिछले कुछ दिनों में धीरे-धीरे मजदूर वापस पहुंच रहे हैं। कई ठेकेदार और मालिकों ने मजदूरों को वापस लाने के लिए टिकट का भी इंतजाम किया है। झाबुआ जिलाधिकारी ने बताया कि यहां के मजदूरों की गुजरात में काफी डिमांड है और उन्हें पैसे भी अच्छी मिल जाती है। यहां के मजदूर मनरेगा में काम नहीं करना चाहते हैं। लिहाजा, सब धीरे-धीरे वापस लौट रहे हैं।

बिहार से भी लौट रहे मजदूर

बिहार से भी कुछ ऐसी ही खबर हैं। यहां के तकरीबन 100 मजदूर पंजाब और मथुरा लौट चुके हैं। मजदूरों का कहना है कि बिहार में लंबे समय तक के लिए काम नहीं मिल सकता है। पंजाब में धान बुवाई का समय है। इसलिए, अब हम यहां लौट गए हैं। इनके अलावा कई शहरों के मजदूर लगातार लौट रहे हैं। कॉन्ट्रेक्टर्स और ठेकेदार लगातार मजदूरों को वापस लाने में लगे हैं और उनके लिए खासा इंतजाम भी किया जा रहा है। सबसे ज्यादा जिन जगहों से मजदूरों की वापस हो रही है, उनमें बिहार, उत्तर प्रदेश , मध्य प्रदेश, झारखंड जैसे राज्य शामिल हैं।

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