INX मीडिया केसः 71 पूर्व नौकरशाहों ने पीएम मोदी को लिखा खुला पत्र, जताई बड़ी चिंता

INX मीडिया केसः 71 पूर्व नौकरशाहों ने पीएम मोदी को लिखा खुला पत्र, जताई बड़ी चिंता
पीएम मोदी (फाइल फोटो)

  • वित्त मंत्रालय के चार पूर्व नौकरशाहों के खिलाफ चल रहा अभियोग
  • पिछले महीने केंद्र सरकार ने सीबीआई को दी थी इसकी स्वीकृति
  • पत्र के माध्यम से नौकरशाहों को राजनीतिक साजिश का शिकार कहा गया

नई दिल्ली। पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम से जुड़े INX मीडिया मामले को लेकर 71 सेवानिवृत्त नौकरशाहों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में सभी ने वित्त मंत्रालय के सेवानिवृत्त चार अधिकारियों पर चलाए गए अभियोग पर चिंता जाहिर करते हुए इसे मामूली राजनीतिक लाभ हासिल करने के इरादे से उठाया जाने वाला कदम करार दिया है।

इस पत्र में लिखा गया है, "हम सेवानिवृत्त अधिकारियों का समूह आपको यह चिंता जाहिर करने के लिए पत्र लिख रहा है ताकि यह बता सके कि जाहिर तौर पर मामूली राजनीतिक फायदे हासिल करने के लिए सेवानिवृत्त और कार्यरत अधिकारियों को विशेषरूप से निशाना बनाया जा रहा है।"

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इस पत्र पर पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार शिवशंकर मेनन, कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर, वित्त सचिव सुनील मित्रा और नरेंद्र सिसोदिया समेत अन्य दिग्गज पूर्व नौकरशाहों के हस्ताक्षर हैं।

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सीबीआई को केंद्र सरकार द्वारा इन चार नौकरशाहों के खिलाफ अभियोग चलाने की स्वीकृति देने के एक माह बाद 4 अक्टूबर का यह पत्र लिखा गया है। केंद्र सरकार ने सीबीआई को इन अधिकारियों के खिलाफ INX मीडिया को वर्ष 2007 में फॉरेन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) क्लीयरेंस देने से जुड़े मामले में अभियोग चलाने की स्वीकृति दी है।

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इन सेवानिवृत्त नौकरशाहों ने दावा किया है कि सिंधुश्री खुल्लर, अनूप पुजारी, प्रबोध सक्सेना और रबिंद्र प्रसाद नाम जिन अधिकारियों के खिलाफ यह अभियोग चलाया गया है, उसका फिलहाल काम करने वाले अधिकारियों पर काफी खतरनाक प्रभाव पड़ेगा।

गौरतलब है कि INX मीडिया केस में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम भी अभियुक्त हैं और फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। चिदंबरम के अभियुक्त बनने की वजह यह है कि जब वह वित्त मंत्री थे, तब ही यह क्लीयरेंस दिया गया था।

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पत्र में आगे लिखा है, "यह सबसे दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन अधिकारियों,को आपराधिक कार्यवाही का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है जो विशेषकर अब सेवा में नहीं हैं और यह सब राजनीति की वजह सेे हो रहा है।"

इस पत्र में यह भी मांग भी की गई है कि एक ऐसा उचित वक्त तय किया जाना चाहिए जिसके बाद फाइलें वापस नहीं खोली जाएं. ताकि विशेषरूप से सेवानिवृत्त के बाद अधिकारियों को यह आश्वासन मिले कि सरकारी नौकरी के बाद का उनका जीवन शांतिपूर्ण रहेगा।

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बता दें कि पत्र में हस्ताक्षर करने वालों में ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट के पूर्व पुलिस महानिदेशक मीरन सी बोरवंकर, पूर्व स्वास्थ्य सचिव केशव देसीराजू और आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर रवि वीर गुप्ता भी शामिल हैं।

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