ये खास 'रोटी' बचाएगी Coronavirus से, इम्यूनिटी सिस्टम होगी मजबूत, जानिए इसकी खासिय

Highlights
-कृषि व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने आम गेहूं के मुकाबले 65 फीसद अधिक जस्ते और आयरन युक्त गेहूं (Iron Wheat) की प्रजाति विकसित करने में सफलता हासिल की है
- वैज्ञानिकों का दावा है कि इस गेहूं के आटे की बनी रोटी खाने से लोगों का इम्यून सिस्टम मजबूत (Immune System Strong) बनेगा
- पंतनगर विवि (Pantnagar University) से विकसित गेहूं की यूपी-2903 प्रजाति का हाल में विमोचन किया था

नई दिल्ली. कोरोना (Coronavirus) का खतरा विश्वव्यापी बन गया है। डॉक्टर (Doctor) और वैज्ञानिकों का दावा है कि इम्यू‍निटी (Immunity) के कमजोर होने से कोरोना वायरस का खतरा अधिक होता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) सही होने से हमें कई बीमारियों से बचा के रखती है। इसलिए जरूरी है कोरोना वायरस से बचने के लिए इम्यू‍निटी (Immunity System) का मजबूत होना।

इसी क्रम में उत्तराखंड के पंतनगर (Uttarakhand Pantnagar) कृषि व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने आम गेहूं के मुकाबले 65 फीसद अधिक जस्ते और आयरन युक्त गेहूं (Iron Wheat) की प्रजाति विकसित करने में सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इस गेहूं के आटे की बनी रोटी खाने से लोगों का इम्यून सिस्टम मजबूत (Immune System Strong) बनेगा, जो कोरोना जैसी घातक बीमारी से बचाव में सहायक साबित होगा।

राज्य प्रजाति विमोचन समिति (State species release committee) ने पंतनगर विवि (Pantnagar University) से विकसित गेहूं की यूपी-2903 प्रजाति का हाल में विमोचन किया था। यह प्रजाति उत्तराखंड के सिंचित क्षेत्रों में (नवंबर में) बुवाई के लिए उपयुक्त है।

जानिए इसकी खासियत

- इस प्रजाति की औसत उत्पादकता 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और उपज क्षमता 70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पाई गई है।
- इस प्रजाति में प्रोटीन की मात्रा जहां 12.68 प्रतिशत पाई गई है।
- वहीं इसमें जस्ते और लौह तत्व की मात्रा लगभग 65 प्रतिशत अधिक है।
- यह प्राय: सामान्य प्रजातियों में नहीं पाई जाती है।
- राष्ट्रीय परीक्षणों में जहां इसमें जस्ते की मात्रा 49 पीपीएम (पार्ट पर मिलियन) से अधिक पाई गई है, वहीं इस प्रजाति में लौह तत्व की मात्रा 47 पीपीएम तक पाई गई है।
- यूपी-2903 जैसी किस्मों का कुपोषण मिटाने मे पर्याप्त योगदान रहेगा।
- गेहूं की इस प्रकार की किस्मों के विकास में अंतरराष्ट्रीय मक्का एवं गेहूं उन्नयन केंद्र (सीमिट), मैक्सिको से आयातित जनन द्रव्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

फास्ट फूड बनाने में होगी मदद

गेहूं की यूपी-2903 प्रजाति विकसित करने वाले पंतनगर विवि के प्राध्यापक एवं वरिष्ठ गेहूं प्रजनक डॉ. जेपी जायसवाल ने बताया कि हमारी टीम का प्रयास है कि भविष्य में जो भी किस्में विकसित हों, वह उच्च उत्पादन क्षमता के साथ रोग एवं कीटों के प्रति अवरोधी होने सहित प्रोटीन, जस्ता और लौह तत्व की प्रचुर मात्रा से युक्त हों। गेहूं हमारे देश की अधिकांश जनसंख्या का मूल भोजन है और गेहूं के आटे का प्रयोग रोटी, ब्रेड, बिस्कुट, के साथ विभिन्न प्रकार के फास्ट फूड तैयार करने मे किया जाता है।

Ruchi Sharma
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