कश्मीर: सरकार के निशाने पर आया जमात-ए-इस्लामी, 70 ठिकाने होंगे सील

  • पुलवामा टेरर अटैक के बाद सरकार ने अब आतंक के सफाए को लेकर कस ली कमर।
  • केंद्र सरकार ने घाटी में टेरर फंडिंग करने वाले संगठन जमात-ए-इस्लामी पर कसा शिकंजा।
  • केंद्र सरकार ने जमात-ए-इस्लामी के कई नेताओं को हिरासत में लिया।

नई दिल्ली। पुलवामा टेरर अटैक के बाद सरकार ने अब आतंक के सफाए को लेकर कमर कस ली है। यही वजह है कि जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी नेताओं पर कार्रवाई करने के बाद अब टेरर फंडिंग संस्थाएं भी सरकार के निशाने पर आ गईं हैं। केंद्र सरकार ने आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन को घाटी में बड़े स्तर पर फंडिंग करने वाले संगठन जमात-ए-इस्लामी पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। केंद्र सरकार ने जमात-ए-इस्लामी के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया।

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UAPA प्रॉपर्टी और एसेट्स प्रोविजन के तहत कार्रवाई

इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर में उसकी 52 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्‍त‍ि को सील किया है। जमात-ए-इस्लामी पर यह कार्रवाई UAPA प्रॉपर्टी और एसेट्स प्रोविजन के तहत की गई। केंद्र ने जमात-ए-इस्लामी की कई संस्‍थाओं की पहचान भी है। इन संस्थाओं में संगठन की ओर से स्कूल व कार्यालयों के साथ अन्य गतिविधियां भी चलाई जा रहीं थी। आपको बता दें कि इससे पहले भी सरकार ने दो बार जमात-ए-इस्लामी संगठन को प्रतिबंधित किया था। 1975 में पहली बार इस संगठन पर जम्मू कश्मीर सरकार ने कार्रवाई की थी, जबकि दूसरी बार केंद्र सरकार ने इस पर 1990 में बैन लगाया था।

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हिज्बुल मुजाहिदीन के पीछे जमात-ए-इस्लामी

जानकारी के अनुसार जमात-ए-इस्लामी घाटी में अलगाववादी और आतंकवादी मानसिकता को बढ़ावा देता आ रहा है। हिज्बुल मुजाहिदीन के पीछे जमात-ए-इस्लामी को ही बताया जाता है। आपको बता दें कि जमात-ए-इस्लामी संगठन पाकिस्तान की शह पर आतंकी गतिविधियों लिप्त् हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों को ट्रेनिंग देता है। इसके साथ उनको फंडिंग करना और शरण देने जैसे कई अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराता है।

2019 pulwama attack
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Mohit sharma
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