Jammu-kashmir : पुलवामा हमले के बाद 43 युवक जैश में शामिल, आतंकी हमलों को दे सकते हैं अंजाम

  • Pulwama में आत्मघाती हमले में शामिल Jaish-e-Mohammed के आतंकवादियों ने इसका वीडियो बनाने की भी योजना बनाई थी।
  • जैश के आतंकियों ने बमबारी करने वाले आदिल डार को कश्मीरी भाषा में शहीद बताया था।

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा हमले ( pulwama attack ) में फरवरी, 2019 में सीआरपीएफ ( CRPF ) के काफिले पर हमले के बाद से कश्मीर घाटी से बड़ी संख्या में स्थानीय युवक लापता हुए हैं। खुफिया सूत्रों की मानें तो इन युवकों में से अधिकांश कुख्यात आतंकी संगठनों से जुड़ गए हैं। अब ये आतंकी घाटी में आतंकी हमलों को अंजाम दे सकते हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले 18 महीनों में जैश-ए-मोहम्मद ( Jaish-e-Mohammed ) का प्रभाव दक्षिण कश्मीर के इलाकों में बढ़ा है। इसी दौरान घाटी से काफी संख्या में कश्मीरी युवक ( Kashmiri Youth ) लापता हुए हैं। युवाओं के लापता होने के पीछे जैश से जुड़ने को अहम कारण माना जा रहा है।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक जैश पिछले 3 वर्षों से धीरे-धीरे अपनी काडर को मजबूत कर रहा है। 2018 के बाद से लापता हुए 80 से अधिक युवा जैश में शामिल हो चुके हैं, जिनमें से 43 पुलवामा हमले के बाद शामिल हुए।

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बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में पिछले साल फरवरी में अर्द्धसैनिक बल के एक काफिले पर हुए आतंकियों ने आत्मघाती हमला ( Suicide attack ) किया था। इस हमले में शामिल जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने वीडियो बनाने की भी योजना बनाई थी। इतना ही नहीं बमबारी करने वाले आदिल डार को कश्मीरी भाषा में उसे शहीद करार दिया था। इस बात की अनौपचारिक जानकारी इस मामले में जांच कर रहे जांचकर्ताओं ने दी है।

जानकारी के मुताबिक 21 साल के आदिल डार फरवरी 2018 में ही पुलवामा में अपने गांव से लापता हो गया था। उसके पिता ने तब उसकी तलाश के लिए पुलिस शिकायत दर्ज की थी। डार बुरहान वानी की तरह युवा था। वह 2016 में बुरहान के एक एक मुठभेड़ में मारे जाने के बाद विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेता थां।

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दूसरी तरफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी ( NIA ) ने भी अपने आरोप पत्र में इस बात का जिक्र किया है। एनआईए ने अपने आरोप पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया है कि आतंकवादी और आत्मघाती हमले के मास्टरमाइंड मोहम्मद उमर फारुख पुलवामा हमले के बाद भारतीय सैनिकों के शवों के वीडियो बनाकर जम्मू-कश्मीर में युवाओं को दिखाने का प्लान था। ताकि उन्हें आतंकी समूह में शामिल होने के लिए राजी किया जा सके।

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