Jammu-Kashmir : आजादी के 73 साल बाद LoC से सटे 3 गांवों में इस वजह से पहली बार पहुंची बिजली

 

  • अभी तक Solar power or gensets के जरिए बिजली की व्यवस्था करते थे लोग।
  • 33 केवी के पावर स्टेशन के जरिए इन गांवों में होगी बिजली की आपूर्ति।
  • Pakistani shelling की वजह से हर साल कई मौकों पर तनाव के साए में रहते हैं यहां के लोग।

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर ( Jammu-Kashmir ) के केरन सेक्टर स्थित 3 गांवों के लोग पहली बार स्वतंत्रता दिवस ( Independence day ) मनाने की तैयारी कर रहे हैं। यानि देश को आजाद हुए 73 साल बीत गए लेकिन नियंत्रण रेखा ( LOC) पर मौजूद इन गांवों के लोग अभी तक बिजली से दूर थे। इन गांवों के लोग बिजली की चकाचौंध में पहली बार आजादी के पर्व के गवाह बनेंगे।

संभवत: यह मौका इसबार भी नहीं मिल पाता, यदि पिछले साल यहां पर धारा 370 ( Article 370 ) समाप्त नहीं हुई होती। 7 दशकों में न तो इस गांव में बिजली पहुंची थी और न ही हर मौसम चलने लायक सड़क ही पहुंच पाई थी। अब 24 घंटे बिजली भी है और बीआरओ ( BRO ) हर मौसम में इस्तेमाल लायक पक्की सड़क भी बना रहा है।

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दरअसल, केरन सेक्टर के ये तीनों गांव एलओसी का अंतिम छोर पर हैं। पाकिस्तानी गोलाबारी ( Pakistani shelling ) के कारण साल के कई मौकों पर तनाव के साए में रहने वाले इन गांवों में अब उम्मीद का बल्ब जलने लगा है। 14000 फीट की ऊंचाई पर रहने वाले यहां के लोग अभी तक सोलर पावर ( Solar Power ) या जेनसेट्स ( gensets ) के जरिए बिजली की व्यवस्था कर पाते थे, लेकिन अब यहां इलेक्ट्रिफिकेशन ( Electrification ) की वजह से पावर सप्लाई ( Power Supply ) का रास्ता साफ हो गया।

बता दें कि नियंत्रण रेखा के संवेदनशील हिस्से में आने वाले गांव केरन, मुंदियां और पतरू गांव में एक 33केवी के पावर स्टेशन से बिजली पहुंचाई गई है। 2 साल में बने इस प्रॉजेक्ट को कश्मीर पावर डिस्ट्रिब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड ( KPDCL ) ने पूरा किया है।

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केपीडीसीएल के एमडी मोहम्मद एजाज असद ने कहा कि प्रॉजेक्ट को लॉकडाउन के कारण तेजी से पूरा किया जा सका है। एजाज असद ने बताया कि ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र में इस प्रॉजेक्ट को पूरा करने में तमाम भौगोलिक मुश्किलें भी आईं। इसके बावजूद तमाम पर्वतीय क्षेत्रों में हाइटेंशन तार और यूटिलिटी पोल्स लगाए गए। चूंकि सारा प्रॉजेक्ट डिफेंस लैंड पर पूरा किया जाना था ऐसे में तमाम विभागीय अप्रूवल लेने के बाद ही प्रॉजेक्ट को पूरा करना संभव हो पाया है।

बिजली आपूर्ति बहाल होने के बाद इन गांवों के लोगों का कहना है कि कश्मीर के हिस्से में 24 घंटे बिजली का सपना अब भी हकीकत से बहुत दूर है। हालांकि इसकी उम्मीद की जा सकती है कि बिजली पहुंचने से इस इलाके में रोजगार और संभावनाओं के रास्ते खुलेंगे।

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Dhirendra Reporting
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