जम्मू-कश्मीर: सरकार ने युवाओं के लिए खोला इंटरनेट फैसिलिटी सेंटर, कई दिनों से बंद हैं इंटरनेट सेवाएं

जम्मू-कश्मीर: सरकार ने युवाओं के लिए खोला इंटरनेट फैसिलिटी सेंटर, कई दिनों से बंद हैं इंटरनेट सेवाएं

Shiwani Singh | Publish: Sep, 23 2019 04:35:19 PM (IST) | Updated: Sep, 23 2019 05:24:48 PM (IST) इंडिया की अन्‍य खबरें

  • युवाओं के लिए जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में खुला इंटरनेट फैसिलिटी सेंटर
  • सेटंर आकर इंटरनेट का उपयोग कर सकते हैं छात्र
  • युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उठाया ये कदम

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटे लगभग 50 दिन हो चुके हैं। तब से घाटी में इंटरनेट सेवाएं बंद हैं। जिसकी वजह से जम्मू-कश्मीर में लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। इंटरनेट बंद होने का सबसे बड़ा नुकसान छात्रों को उठाना पड़ रहा है। लेकिन सरकार ने जम्मू-कश्मीर के छात्रों के हितों और भविष्य को ध्यान में रखते हुए पुलवामा में एक इंटरनेट फैसिलिटी सेंटर शुरू किया है।

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इस सेंटर पर जाकर कोई भी छात्र इंटरनेट का उपयोग कर सकता है। साथ ही छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं के फार्म भी भर सकते हैं। एडिशनल डिप्टी कमिश्नर मो. अशरफ हक के मुताबिक, इस इंटरनेट सेंटर पर छात्र यहां आ सकते हैं, इंटरनेट का उपयोग कर सकते हैं और विभिन्न फॉर्म भर सकते हैं। युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।

 

वहीं, दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवा बंद होने की वजह से सैकड़ों युवाओं को नौकरी जाने का डर सता रहा है। सबसे बड़ी परेशानी आईटी सेक्टर में काम कर रहे युवओं के सामने बनी हुई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीनगर में कई कंप्यूटर इंजीनियर हैं जिनके पास कोई काम नहीं। वे रोज ऑफिस जातें हैं लेकिन इंटरनेट ना होने की वजह से उनके पास किसी भी तरह का काम नहीं है। कंपनी ने कई कर्मचारियों को गुलाबी पर्चियां दी हैं।

श्रीनगर के बाहरी इलाके में बडगाम जिले के रंगरेथ में विशाल सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) हब है, जो अब बिल्कुल बंद है। घाटी का एकमात्र आईटी हब अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहा है। बता दें कि इस आईटी हब में लगभग 1,200 कर्मचारी हैं जो रंगरेथ कॉम्प्लेक्स में काम करते हैं।

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कुछ फर्में हैं जो एक दशक से अधिक समय से काम कर रही हैं। घाटी में इंटरनेट सेवाएं बंद होने की वजह से उन्हें अपने कर्मचारियों के वेतन का 60% हिस्सा काटना पड़ा। इंटरनेट सेवाएं बंद होने के कारण वे वित्तीय नुकसान उठाने में असमर्थ हैं।

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