जुमलेबाजी से नहीं मिलेगा लाखों बच्चों को न्याय, संसद में लटका एंटी ट्रैफिकिंग बिल: कैलाश सत्यार्थी

जुमलेबाजी से नहीं मिलेगा लाखों बच्चों को न्याय, संसद में लटका एंटी ट्रैफिकिंग बिल: कैलाश सत्यार्थी

लाखों बच्चों से जुड़ा एंटी ट्रैफिकिंग बिल पास नहीं हुआ लेकिन दो दिन में चुनाव में फायदा देने वाला आरक्षण बिल पास हो गया।

नई दिल्ली। एकबार फिर संसद का सत्र खत्म हो गया, हमारे सांसदों ने काम से ज्यादा सदन में हंगामा किया। शीत सत्र के दौरान लोकसभा की 17 बैठकों में 47 फीसदी काम और राज्यसभा की 18 बैठकों में 27 फीसदी काम हुआ। इसके बावजूद आखिरी दो दिनों में लोकसभा चुनाव को देखते हुए लाए गए सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए 10 फीसदी आरक्षण का बिल बहुमत से पास हो गया। लेकिन सालों राज्यसभा में अपनी बारी का इंतजार कर रहे एंटी ट्रैफिकिंग विधेयक पास नहीं हो पाया है।

'बच्चे अभी भी राजनीतिक प्राथमिकता में शामिल नहीं'

नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि राज्यसभा में ट्रैफिकिंग विधेयक पारित नहीं हो पाना इस बात को प्रमाणित करता है कि बच्चे अभी भी राजनीतिक प्राथमिकता में शामिल नहीं हैं। सत्यार्थी ने कहा कि भारत का राजनीतिक वर्ग एक बार फिर उन लाखों बच्चियों और बच्चों को सुरक्षित करने में विफल साबित हुआ, जिनको जानवरों से भी कम कीमत पर खरीदा और बेचा जाता है। उन्होंने कहा कि ट्रैफिकिंग (र्दुव्‍यापार) के पीड़ित ये बच्चे इस बार राज्यसभा में विधेयक के पारित होने की आस लगाए बैठे थे, लेकिन उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। राज्यसभा में ट्रैफिकिंग विधेयक पारित न होना, इस बात को प्रमाणित करता है कि बच्चे अभी भी राजनीतिक प्राथमिकता में शामिल नहीं हैं।

'बयानबाजी और जुमलेबाजी से नहीं मिलेगा न्याय'

कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि महज नारेबाजी, बयानबाजी और जुमलेबाजी कभी भी हमको न्याय की डगर तक नहीं पहुंचा सकती और न ही यह सामाजिक बदलाव में सहायक हो सकती है। पिछले कुछ दिनों में हर किसी ने यह देख लिया है कि किस तरह से संसदरूपी लोकतंत्र के मंदिर का उपयोग राजनीतिक और चुनावी लाभ प्राप्त करने के लिए किया जा रहा है। उसको देखते हुए यही कहा जा सकता है कि हमारे चुने हुए प्रतिनिधि उन बड़े सरोकारों के प्रति कतई चिंतित नहीं हैं जो मासूम और बेदाग बचपन को लील रहा है।

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