200 करोड़ में बिकेगा कानपुर जंक्शन! 28 जून को होगी नीलामी

केंद्र सरकार ने देश के 23 स्टेशनों को निजी हाथों में सौंपने का फैसला किया है। इसमें यूपी के कानपुर सेंट्रल और इलाहाबाद जंक्शन शामिल हैं। कानपुर रेलवे स्टेशन की कीमत 200 करोड़ रुपए रखी गई है।

कानपुर। केंद्र सरकार ने देश के 23 स्टेशनों को निजी हाथों में सौंपने का फैसला किया है। इस फेहरिस्त में राजस्थान का उदयपुर व यूपी के दो स्टेशन शामिल हैं। पहला कानपुर सेंट्रल और दूसरा इलाहाबाद जंक्शन। 28 जून को ऑनलाइन नीलामी होनी है। इच्छुक कंपनी या व्यक्ति रेलवे की वेबसाइट पर जाकर स्टेशनों की बोली लगा सकेगी। कानपुर रेलवे स्टेशन की कीमत 200 करोड़ रुपए और इलाहाबाद जंक्शन की 150 करोड़ रुपए रखी गई है। नीलामी के दो दिन बाद 30 जून को इसका ऐलान होगा। 
Image may contain: sky and outdoor

ये भी पढ़ें-

रेलवे सिर्फ सुरक्षा, टिकट बिक्री करेगा
स्टेशनों को निजी हाथों में सौंपने के बाद रेलवे सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था, टिकट बिक्री और पार्सल के साथ-साथ ट्रेनों के परिचालन की जिम्मेदारी संभालेगा। रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था से इतर निजी कंपनी के गार्ड भी शॉपिंग मॉल और मल्टीप्लेक्स की तरह स्टेशन परिसर के अलग-अलग हिस्सों में तैनात रहेंगे। तय किया गया है कि इस व्यवस्था में 45 साल के लिए स्टेशन को संबंधित निजी कंपनी को लीज पर दिया जाएगा। इस अवधि में कंपनी को अमुक रेलवे स्टेशन को विश्वस्तरीय सुविधाओं से परिपूर्ण करना होगा। प्लेटफार्म पर फूड स्टॉल, रिटायरिंग रूम, फ्रेश एरिया, प्ले एरिया भी विकसित किए जाएंगे।
Image may contain: sky and outdoor

खाली जमीन पर बनेंगे मॉल-मल्टीप्लेक्स
रेलवे ने स्टेशनों की नीलामी से पहले यह स्पष्ट कर दिया है कि निजी कंपनी किसी भी सूरत में स्टेशनों के हेरिटेज स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं करेगी। यानी कानपुर सेंट्रल और इलाहाबाद स्टेशन का स्वरूप जस का तस रहेगा। स्टेशन परिसर की खाली जगह में स्टेशन को खरीदने वाली कंपनी फाइव स्टार होटल, शॉपिंग मॉल और मल्टीप्लेक्स बनाएगी। 


ये भी पढ़ें-


आमदनी बंटवारे पर रजामंदी बाकी
रेलवे ने स्टेशनों को विकसित करने के लिए निजी कंपनियों को आमंत्रित कर लिया है, लेकिन आमदनी में बंटवारे का फॉर्मूला तय नहीं हुआ है। रेलवे फिफ्टी-फिफ्टी का फॉर्मूला लागू करना चाहती है, जबकि निजी कंपनियों का तर्क है कि संसाधन और सेवा मुहैया कराने में लगातार खर्च आएगा, ऐसे में 70-30 फीसदी की हिस्सेदार तय होनी चाहिए। स्टेशनों को विश्वस्तरीय बनाने के लिए निजी कंपनी के साथ अनुबंध करने की शुरुआत मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के हबीबगंज स्टेशन से शुरू हुई है। 
Show More
ललित fulara
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned