#KarSalaam: पाक सेना की धूंआधार कुटाई के बाद सरकार ने जोड़ लिए थे हाथ, रोने लगा था गवर्नर

Sunil Chaurasia

Publish: Jan, 13 2018 06:49:25 PM (IST)

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#KarSalaam: पाक सेना की धूंआधार कुटाई के बाद सरकार ने जोड़ लिए थे हाथ, रोने लगा था गवर्नर

पाक सरकार की क्रूक हुकुमत से परेशान होकर बंगाली लोग सड़कों पर उतर आए। बगावत की आंच महसूस करते हुए सरकार ने बंगालियों पर अत्याचार बढ़ा दिए

नई दिल्ली। 1947 में हमारा देश आज़ाद तो हुआ ही था, लेकिन साथ ही हमारा बंटवारा भी हो गया था। मोहम्मद अली जिन्ना ने जिस आधार पर देश के दो टुकड़े कराए था, उसका सबसे बड़ा उद्देश्य भारत के प्रति पाकिस्तान में नफरत फैलाना था। भारत की बर्बादी के सपने लिए पैदा हुआ पाकिस्तान आज भी हमें नुकसान पहुंचाने की पूरी कोशिश करता है, लेकिन हमारी सेना की ताकत को हमेशा से कमज़ोर आंकने वाला मूर्ख पाकिस्तान आज भी हमारे जवाब से कराह उठता है।

यहां तक की मौलाना आजाद ने भी पैदा होने वाले पाकिस्तान के इरादों को पहले ही स्पष्ट कर दिया था। आज़ाद ने कहा था कि पाकिस्तान का निर्माण सिर्फ नफरत की बुनियाद पर हो रहा है, और जिस दिन नफरत खत्म होगी उस दिन इस मुल्क का वजूद खत्म हो जाएगा। और इत्तेफाक तो देखिए हुआ भी वही जो पाकिस्तान के जन्म से पहले ही कहा गया था। भारत की मदद से पूर्वी पाकिस्तान 1971 में पाकिस्तान से आज़ाद होकर बांग्लादेश बन गया।

पाक सरकार की क्रूक हुकुमत से परेशान होकर बंगाली लोग सड़कों पर उतर आए। बगावत की आंच महसूस करते हुए सरकार ने बंगालियों पर अत्याचार बढ़ा दिए और न जाने कितने बेकसूर लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। पूर्वी पाकिस्तान के लोगों की ऐसी स्थिती भारत ने नहीं देखी जा रही थी। भारत की मदद के बिना बांग्लादेश का आज़ाद होना नामुमकिन था। उस वक्त पूर्वी पाकिस्तान ने भारत से मदद मांगी थी। भारत की खूफिया एजेंसी ने सूचना दी थी कि 14 दिसंबर 1971 को पाक सेना की एक गुप्त मीटिंग होने वाली है।

इधर हमारी सेना ने पाक सेना की इस बैठक को नाकाम करने के लिए पूरी योजना बना ली थी। आदेश मिलते ही एयर फोर्स ने मिग 21 लड़ाकू विमान से उस बिल्डिंग पर हमले करने शुरु कर दिए जहां पाक सेना की मीटिंग हो रही थी। सेना के हमले से पाकिस्तानी गवर्नर इतना घबरा गया था कि वो मीटिंग हॉल में ही रोने लगा। बताया जाता है कि पाक गवर्नर ने कैसे भी करके वहां मौजूद एक टेबल के नीचे छिपकर अपनी जान बचाई थी। जैसे-तैसे जान बची, जिसके बाद उसने पद से इस्तीफा दे दिया। ताबड़तोड़ हमले के बाद पाकिस्तान के नकली हौंसले पस्त हो गए और उनकी बुझदिल सेना ने ढाका के एक बड़े से मैदान में हमारी सेना के आगे सरेंडर कर दिया।

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