कठुआ गैंगरेप-मर्डर केसः जानिए देश को झकझोरने वाले इस कांड में कब-क्या हुआ?

कठुआ गैंगरेप-मर्डर केसः जानिए देश को झकझोरने वाले इस कांड में कब-क्या हुआ?

Dhirendra Kumar Mishra | Publish: Jun, 10 2019 01:58:03 PM (IST) | Updated: Jun, 10 2019 03:12:55 PM (IST) इंडिया की अन्‍य खबरें

  • 10 जनवरी, 2018 को कठुआ के 8 साल की बच्‍ची का अपहरण हुआ था
  • 17 जनवरी, 2018 को बच्‍ची की लाश जंगल में मिली
  • 10 जून, 2019 को अदालत ने छह आरोपियों को दोषी करार दिया

नई दिल्ली। पठानकोट की विशेष अदालत ने ठीक डेढ़ साल बाद बहुचर्चित कठुआ गैंग रेप और हत्या मामले में सोमवार को अपना फैसला सुना दिया। विशेष अदालत ने सात आरोपियों में से छह को दोषी करार दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद से यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। आइए जानते हैं, क्‍या है कठुआ गैंग रेप और हत्‍याकांड से जुड़ी खास बातें:

ये है कठुआ गैंगरेप का पूरा मामला

1. जम्मू के कठुआ स्थित गांव रसाना की आठ साल की बच्ची 10 जनवरी, 2018 को लापता हो गई थी। काफी तलाशने के बाद बच्ची के पिता ने 12 जनवरी, 2018 को हीरानगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। लापता होने के 7 दिनों बाद 17 जनवरी, 2018 को जंगल में बच्ची की लाश मिली।

2. बच्ची के साथ हुई हैवानियत के विरोध में परिजनों ने प्रदर्शन किया और हाईवे जाम कर दिया। 18 जनवरी, 2018 को एक आरोपी का सुराग लगा और उसे दबोच लिया गया।

3. 22 जनवरी, 2018 को पुलिस ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी। इस बीच कुछ लोग आरोपियों के पक्ष में खड़े हो गए। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (जम्मू) भी इस आंदोलन में शरीक हो गया। परिणाम यह निकला कि 9 अप्रैल को चार्जशीट दाखिल नहीं हो पाई। फिर क्राइम ब्रांच ने 10 अप्रैल को चार्जशीट दाखिल की।

 

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4. चार्जशीट का वकीलों ने विरोध करते हुए 11 अप्रैल और 12 अप्रैल को पूरे जम्मू-कश्मीर में बंद बुलाया। जम्‍मू के वकील कठुआ जिला जेल के बाहर लगातार प्रदर्शन करते रहे। पीड़ित परिवार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला कठुआ से पठानकोट की सेशन कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 1 जून, 2018 से इस मामले में रोजाना आधार पर सुनवाई पंजाब के पठानकोट में जिला और सत्र अदालत में शुरू हुई थी।

5. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले के नाबालिग आरोपी को छोड़कर सभी आरोपियों को गुरदासपुर जेल में शिफ्ट कर दिया गया। बचाव पक्ष के वकीलों की संख्या को भी सीमित कर दिया गया।

6. इस केस में दो पुलिसकर्मियों पर भी गाज गिरी है। क्राइम ब्रांच ने ग्राम प्रधान सांजी राम, उसके बेटे विशाल, किशोर भतीजे और उसके दोस्त आनंद दत्ता और दो विशेष पुलिस अधिकारियों दीपक खजुरिया और सुरेंद्र वर्मा को भी गिरफ्तार किया।

हेड कांस्टेबल तिलक राज और उप निरीक्षक आनंद दत्ता, जिन्होंने कथित रूप से सांजी राम से 4 लाख रुपए लिए और महत्वपूर्ण सबूत नष्ट करने वाले को भी गिरफ्तार किया।

 

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7. इस केस में धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), धारा 302 (हत्या) और 376डी (सामूहिक दुष्कर्म) के तहत आरोप तय किए हैं। कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। सात के खिलाफ दुष्कर्म और हत्या के आरोप तय किए गए। किशोर आरोपी के खिलाफ मुकदमा अभी शुरू नहीं हुआ है और उसकी उम्र संबंधी याचिका पर जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय सुनवाई करेगा।

8. पठानकोट में जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश तेजविंदर सिंह को सुनवाई की जिम्‍मेदारी सौंपी गई। कोर्ट ने 8 जून, 2018 को सात आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म और हत्या के आरोप तय किए थे। केस में कुल 221 गवाह बनाए गए हैं। 55वें गवाह के रूप में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर पेश हुए।

9. 56वें गवाह के रूप में फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के एक्सपर्ट को पेश किया गया। जब से केस की सुनवाई शुरू हुई, तब से अब तक सभी तारीखों पर सुनवाई की वीडियोग्राफी कराई गई है। सातों आरोपी इस समय गुरदासपुर की जेल में रखे गए हैं। इस मामले में 3 जून, 2019 को ट्रायल पूरा हो गया था। लेकिन अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

10. 10 जून, 2019 को पठानकोट की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। विशेष अदालत ने सात आरोपियों से से छह को दोषी करार दिया है।

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