लॉकडाउन बढ़ाने के बाद लोकल ट्रेनों में भीड़ रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार की विशेष योजना

  • महाराष्ट्र में लोकल ट्रेनों में भीड़ नियंत्रित करने के लिए ऐप और कलर कोडिंग की योजना।
  • राज्य सरकार ने सभी यात्रियों को अनुमति देने के लिए पश्चिमी और मध्य रेलवे से कहा था।
  • रेल अधिकारियों ने भीड़ नियंत्रण के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने के लिए कहा था।

मुंबई। महाराष्ट्र में पहले से लागू लॉकडाउन को आगामी 30 नवंबर तक बढ़ाने के बाद अब उपनगरीय ट्रेनों में भीड़ को नियंत्रित करने की योजना बना रही है। कोरोना वायरस महामारी के बीच महाराष्ट्र सरकार मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) और इससे सटे इलाकों तक दिन में तीन अलग समय के स्लॉट में जल्द ही सभी यात्रियों के लिए उपनगरीय ट्रेनों के संचालन को शुरू करने की तैयारी में जुटी हैं। सरकार ट्रेनों में भीड़भाड़ को रोकने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है।

उपनगरीय ट्रेनों के नॉन-पीक घंटे (कम भीड़भाड़ वाला वक्त) सुबह 7.30 बजे से पहले, दोपहर 11 बजे से 4 बजे के बीच और रात 8 बजे के बाद मानें जाते हैं। महाराष्ट्र सरकार इसके लिए एक वेब-आधारित एप्लिकेशन (ऐप) विकसित कर रही है। इसके लिए नॉन-पीक घंटों के दौरान जनता को उपनगरीय ट्रेनों का इस्तेमाल करने की अनुमति देते हुए कलर-कोडिंग सिस्टम शुरू करने की योजना बना रही है।

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राज्य सरकार ने सभी यात्रियों को सफर की अनुमति देने के लिए पश्चिमी और मध्य रेलवे से अनुरोध किया था। इसके जवाब में रेल अधिकारियों द्वारा सरकार से भीड़ नियंत्रण के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया था> राज्य सरकार ने रेलवे के प्रस्ताव पर काम शुरू कर दिया है।

महाराष्ट्र सरकार के राहत और पुनर्वास विभाग के सचिव किशोर राजे निंबालकर ने कहा, "हम ऐप विकसित करेंगे। हम उपनगरीय ट्रेनों में यात्रियों की संख्या को सीमित करने के लिए कलर-कोडिंग मैकेनिज्म पर भी काम कर रहे हैं।" राज्य सचिवालय के एक अधिकारी ने कहा, इस ऐप से यात्रियों को टिकट बुक करने और यात्रा करने का टाइम स्लॉट तय करने में मदद मिलेगी।

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इससे रेलवे अधिकारी ट्रेनों में भीड़भाड़ को रोकने के लिए टिकटों की निर्धारित संख्या जारी कर सकेंगे। टिकटों को कलर-कोड वाले यात्रियों को जारी किया जाएगा, जिसमें उस टाइम स्लॉट को निर्दिष्ट किया जाएगा जिसके दौरान उन्हें यात्रा करने की उम्मीद है। पश्चिमी और मध्य रेलवे अधिकारियों ने उनकी क्षमता को लेकर चिंता जताई है। वे प्रतिदिन 3,100 ट्रेनें चला सकते हैं।

उन्होंने असमर्थता की दलील देते हुए कहा है कि वे कोविड-19 से पूर्व के 70 यात्री प्रतिदिन की तुलना में फिलहाल प्रतिदिन 700 यात्रियों और प्रतिदिन लगभग 22 लाख यात्रियों को सफर की अनुमति देंगे। राज्य सरकार ने कहा है कि ट्रेनों में भीड़भाड़ को रोकने के लिए उचित कदम उठाए जा रहे हैं।

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इस संबंध में राज्य सरकार के एक अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया, "हमने निजी क्षेत्र के 30 फीसदी कर्मचारियों को ट्रेनों से यात्रा करने की अनुमति दी है, जिससे दैनिक यात्रियों की संख्या लगभग 20 लाख तक कम हो गई हैं। इसके अलावा अन्य 20 लाख मुसाफिर स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के बंद करने के कारण कम हो गए हैं। अगर रेलवे अधिकारी अपनी पूरी ताकत से 3,100 ट्रेन सेवाओं का संचालन करते हैं, तो पीक आवर्स के दौरान अधिक भीड़भाड़ नहीं होगी। हमने हर घंटे महिला यात्रियों के लिए एक विशेष ट्रेन चलाने का भी सुझाव दिया है। यह कदम विभिन्न कार्यालयों के समय को प्रोत्साहित करने के अनुरूप है। ज्यादा महिला स्पेशल ट्रेनें महिला यात्रियों को नॉन-पीक घंटों के दौरान यात्रा करने में मदद करेंगी।"

उन्होंने कहा, "हम अधिक प्रतिबंध नहीं लगाना चाहते हैं, लेकिन यात्रियों को अलग-अलग वक्त में सफर के लिए प्रोत्साहित करते हैं। अब, यह रेलवे अधिकारियों पर निर्भर है कि वे अपनी पूरी ताकत से काम करें।" मुंबई के अभिभावक मंत्री असलम शेख ने कहा कि राज्य प्रशासन कोविड-19 के प्रकोप के बावजूद सभी यात्रियों के लिए जल्द से जल्द ट्रेन सेवा फिर से शुरू करना सुनिश्चित करेगा।

Coronavirus Pandemic
अमित कुमार बाजपेयी
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