मनमोहन सिंह ने भारत में बढ़ रही बेरोजगारी के लिए नोटबंदी के फैसले को बताया जिम्मेदार

Highlights

  • पूर्व पीएम ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्यों से परामर्श नहीं लिया।
  • मनमोहन सिंह ने कहा कि केरल और कई अन्य राज्यों में लोक वित्त अव्यवस्थित है।

नई दिल्ली। पूर्व पीएम डॉ.मनमोहन सिंह ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर करारा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि 2016 में भाजपा की सरकार द्वारा ‘बगैर सोच-विचार के किए नोटबंदी के फैसले’ के कारण देश में बेरोजगारी चरम पर है। कई अनौपचारिक क्षेत्र खस्ताहाल स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्यों से परामर्श नहीं लिया।

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आर्थिक विषयों के ‘थिंक टैंक’ राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज द्वारा डिजिटल माध्यम से आयोजित एक विकास सम्मेलन का उद्घाटन कर मनमोहन सिंह ने कहा कि बढ़ते वित्तीय संकट को छिपाने के लिए भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा किये गए अस्थायी उपाय के कारण छोटे और मझोले (उद्योग) क्षेत्रों की स्थिति खराब हो सकती है। इस स्थिति की हम अनदेखी नहीं कर सकते हैं। उन्होंने ‘प्रतीक्षा 2030’ में कहा कि बेरोजगारी चरम पर है और अनौपचारिक क्षेत्रों का बुरा हाल है। यह संकट 2016 में बगैर सोच-विचार के लिए गए नोटबंदी के फैसले के कारण हुआ है।’

मनमोहन सिंह ने कहा कि केरल और कई अन्य राज्यों में लोक वित्त अव्यवस्थित है, इस कारण राज्यों को अत्यधिक मात्रा में कर्ज लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे भविष्य के बजट पर असहनीय बोझ बढ़ गया है।

आईटी क्षेत्र में रफ्तार कायम - मनमोहन

मनमोहन सिंह के अनुसार ‘डिजिटल माध्यमों के उपयोग बढ़ने से आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी) क्षेत्र अपनी रफ्तार कायम रख सकता है, लेकिन पर्यटन क्षेत्र बुरी तरह से प्रभावित हुआ है और केरल में महामारी ने इस क्षेत्र (पर्यटन) को काफी प्रभावित किया है।’

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Mohit Saxena
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