Bihar Election 2020: तीसरे चरण में मुस्लिम वोटर्स की अहम भूमिका, 31 फीसदी प्रत्याशियों पर हैं आपराधिक मामले

  • Bihar Election 2020 तीसरे चरण में अहम है मुस्लिम वोटर्स का रोल
  • इस चरण में 17 फीसदी वोट मुसमानों का है
  • किशनगंज, कटिहार, अररिया और पूर्णिया जैसे सभी मुस्लिम बहुल जिले

नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव ( bihar assembly election ) के तीसरे और अंतिम चरण का मतदान जारी है। 15 जिलों की 78 सीटों पर हो रहे मतदान के लिए 1204 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। कोरोना काल के बीच पीएम मोदी, राहुल गांधी से लेकर सीएम नीतीश कुमार तक दिग्गजों ने बिहार की जनता से ज्यादा से ज्यादा संख्या में घरों से बाहर निकलकर वोट डालने की अपील की है।

तीसरे चरण की बात करें तो इसमें मुस्लिम वोटरों की अहम भूमिका रही है। यही वजह है कि असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस चरण में अपने उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है।

हालांकि प्रदेश के मुस्लिम वोटरों में आरजेडी को लेकर सॉफ्ट कॉर्नर रहा है, ऐसे में आरजेडी के लिए भी तीसरे चरण में अच्छा प्रदर्शन रहता है तो उनकी जीत के अवसर बढ़ जाते हैं।

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आखिरी चरण की 78 सीटों में से 24 सीट ऐसी हैं जहां मुसलमानों का वोट ये तय करता है कि कौन जीतेगा और कौन हारेगा। इस चरण में 17 फीसदी वोट मुस्लिमों का है। यानी राज्य के करीब आधे मुस्लिम इस चरण में मतदान करेंगे।

ये जिले मुस्लिम बहुल
इस चरण में किशनगंज, कटिहार, अररिया और पूर्णिया जैसे सभी मुस्लिम बहुल जिले आते हैं। जहां हर चौथा वोटर मुस्लिम है। आरजेडी इस बार कांग्रेस और वाम दलों के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है, जो अपने पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक के फिर से एकत्रित करने की उम्मीद कर रही है।

24 सीटों में दावा पक्का
सीमांचल की चाबी मुस्लिमों के हाथ में ही रही है। किशनगंज, अररिया, कटिहार और पूर्णिया की 24 सीटें जिसकी झोली में आ जाती है इस चरण में उसकी जीत अवसर बढ़ जाते हैं। 24 सीटों में से 3 सीटें ऐसी भी हैं जहां 20 फीसदी से कम मुस्लिम आबादी है, लेकिन इनका असर पूरा है।

ये था पिछला परिणाम
इन 78 सीटों पर 2015 में जेडीयू ने 23 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं आरजेडी और बीजेपी के खाते में 20-20 सीटें आई थी और कांग्रेस ने 11 पर जीत दर्ज की थी।

31 फीसदी प्रत्याशियों पर आपराधिक मामले
तीसरे चरण की 78 सीटों पर चुनाव लड़ रहे 1204 उम्मीदवारों में से 31 फीसदी प्रत्याशियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। यानी 371 प्रत्याशियों के खिलाफ आपराधिक केस हैं। ऐसे में इन बाहुबलियों और आपराधिक मामलों में लिप्त रहे प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला ईवीएम में कैद हो जाएगा।

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तीसरे चरण के वोटरों पर ओवैसी के डोरे
तीसरे चरण के वोट युद्ध में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM भी शामिल है। ओवैसी इस इलाके की मुस्लिम बहुल आबादी पर डोरे डाल रहे हैं। ओवैसी की इसी सेंधमारी का सबसे ज्यादा डर आरजेडी को है, क्योंकि तीसरे चरण के मुस्लिम वोटरों से आरेजडी को अच्छा समर्थन मिलता आया है।

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धीरज शर्मा
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