अयोध्या फैसले पर विवादित टिप्पणी करने के मामले में 'नेशनल हेराल्ड' ने मांगी माफी

  • नेशनल हेराल्ड ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा और विश्व हिन्दू परिषद के इच्छा अनुरूप फैसला दिया है
  • नेशनल हेराल्ड ने विवाद बढ़ता देख अपने आलेख को डिलिट कर दिया और माफी मांग ली

नई दिल्लीअयोध्या मामले पर देश की सर्वोच्च अदालत ने शनिवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट के इस फैसले पर देशभर के लोगों व धर्म-संप्रदाय की ओर से प्रतिक्रियाएं आई। सभी ने एक स्वर में इस बात को माना कि कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक और सर्वमान्य है।

सियासी दलों ने भी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की और न चाहते हुए भी कुछ दलों को समर्थन में बयान देना पड़ा। क्योंकि इससे पहले तक राम मंदिर के मामले पर कई सियासी दल इस फैसले के बिल्कुल विपरित विचार रखते आए हैं।

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इसी कड़ी में कांग्रेस ने भी अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। लेकिन अगले ही दिन पार्टी के मुखपत्र 'नेशनल हेराल्ड' में पार्टी के रुख के विपरीत एक आलेख छपा, जिसको लेकर अब काफी आलोचना हो रही है।

कांग्रेस ने अयोध्या फैसले पर कहा था कि वह राम मंदिर के निर्माण के पक्ष में है। लेकिन उसकी आलोचना नेशनल हेराल्ड में छपे एक लेख में यह कहे जाने को लेकर हो रही है कि सुप्रीम कोर्ट ने वैसा ही फैसला दिया, जैसा विश्व हिंदू परिषद और भाजपा चाहती थी।

वेबसाइट से हटाया गया आलेख, मांगी माफी

बता दें कि जब यह आलेख लोगों के सामने आया तो सबने कड़ी आपत्ति जताई। भाजपा ने इसे मुद्दा बनाकर कांग्रेस पर हमला करना शुरू कर दिया। लिहाजा मामले की गंभीरता को देखते हुए नेशनल हेराल्ड ने विवादित आलेख को अपनी वेबसाइट से हटा लिया और सोशल मीडिया से इसके लिंक को भी डिलीट कर दिया।

इसके अलावा नेशनल हेराल्ड ने रविवार को इस आलेख के लिए माफी मांग ली है। नेशनल हेराल्ड ने एक माफीनामा ट्वीट किया, जिसमें कहा गया है, 'अगर आलेख से हिंदू भक्तों या किसी समूह की भावनाएं आहत हुई हैं तो हम माफी मांगते हैं। आलेख में व्यक्त किए गए विचार एक लेखक की निजी राय है, नेशनल हेराल्ड की नहीं।’

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कांग्रेस नेतृत्व द्वारा नाखुशी जाहिर किए जाने के बाद एडिटर-इन-चीफ ने माफीनामा जारी किया गया। सूत्रों का कहना है कि उस आलेख को नेशनल हेराल्ड द्वारा वेबसाइट पर अपलोड किए जाने को लेकर पार्टी नेतृत्व नाराज है।

नेशनल हेराल्ड के ट्रस्ट में मोतीलाल वोरा भी शामिल हैं, लेकिन राजाना के मामलों के प्रबंधन की जिम्मेदारी राहुल गांधी के करीबी सहयोगी कनिष्क सिंह को मिली हुई है।

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Anil Kumar
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