पापोन किस विवाद से सबक, बाल कलाकारों को लेकर टीवी के दिशानिर्देशों में होगा संशोधन

पापोन किस विवाद से सबक, बाल कलाकारों को लेकर टीवी के दिशानिर्देशों में होगा संशोधन

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) रियलिटी टीवी शो में शामिल होने वाले बाल कलाकारों के लिए दिशानिर्देशों को संशोधित करने पर विचार कर रहा है।

नई दिल्ली। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) रियलिटी टीवी शो में शामिल होने वाले बाल कलाकारों के लिए दिशानिर्देशों को संशोधित करने पर विचार कर रहा है। गायक पापोन और एक नाबालिग लड़की को लेकर पैदा हुए विवाद के बाद NCPCR इस विषय पर विचार कर रहा है।

पोस्को जैसे एक्ट के कुछ प्रावधानों में बदलाव
एनसीपीसीआर के एक अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'बदले हालात में नए दिशानिर्देशों पर विचार किया जा रहा है। किशोर न्याय कानून और प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ओफेंस (पोस्को) एक्ट जैसे कुछ कानूनी प्रावधानों को संशोधित करने पर विचार किया जा रहा था, लेकिन इसमें समय लगेगा।'

इस वजह से लिया गया ये फैसला
आपको बता दें कि पिछले महीने टीवी शो पर पपोन ने एक नाबालिग प्रतिभागी को गलत तरीके से 'किस' किया था, जिसके चलते बाल अधिकार निकाय ने उनके खिलाफ नोटिस जारी कर दिया था। इस घटना के बाद पपोन ने रियलिटी शो छोड़ दिया। बता दें इस शो में वह निर्णायक थे।

रियलिटी टीवी शो से संबंधित लिखित शिकायतें ज्यादा
NCPCR के मुताबिक, रियलिटी टीवी शो से संबंधित लिखित शिकायतें ज्यादा मिल रही हैं।इनमें ऐसी जगहों के मामले अधिक हैं जहां शूटिंग के दौरान बच्चों को 12 घंटों से अधिक समय तक काम लिया जाता है। अधिकारी ने कहा, 'हम बहुत सारे लोगों को शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए हम टीवी चैनल संघों से भी संपर्क करेंगे और नए दिशानिर्देशों को लागू करने पर चर्चा करेंगे क्योंकि वे इसमें भी शामिल हैं।'

फरवरी में भी उठाया गया था बच्चों के लिए ऐसा कदम
गौरतलब है कि इससे पहले हाल ही में टीवी से जुड़े बच्चों और नाबालिगों के हित को लेकर सरकार ने कई फैसले लिए हैं। फरवरी में भारत सरकार ने कार्टून चैनलों के लिए एक बड़ा आदेश जारी किया था। सरकार ने बच्चों के स्वास्थ को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया कि इन चैनलों पर जंक फूड के विज्ञापन नहीं दिखाए जाएंगे। सरकार ने इस विषय में संसद को जानकारी देते हुए बताया था कि यह कदम बच्चों को जंक फूड से बचाने की कोशिश में उठाया गया है। साथ ही ये भी बताया गया कि इस फैसले के बाद 9 प्रतिष्ठित फूड कंपनियों ने बच्चों के चैनलों पर ऐसे विज्ञापन नहीं देने का वादा किया था।

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