इन 10 बिंदुओं में जानें, क्या है NIA संशोधन बिल

इन 10 बिंदुओं में जानें, क्या है NIA संशोधन बिल

  • बुधवार को Rajy Sabha में पारित होगा NIA Amendment Bill 2019
  • Loksabha में पारित हो चुका है NIA संशोधन बिल
  • 278 के मुकाबले विरोध में पड़े थे मात्र 6 वोट

नई दिल्ली। राज्यसभा में बुधवार को 'एनआईए संशोधन विधेयक 2019’ ( NIA Amendment Bill 2019 ) पारित होगा। इससे पहले बीती सोमवार को लोकसभा ( Lok Sabha ) में इस बिल को पारित किया जा चुका है। निचले सदन में तीखी नोकझोंक के बीच इस बिल को मंजूरी दे दी गई थी। संशोधन के बाद NIA के अधिकार का दायरा और बढ़ जाएगा। सदन में एनआईए संशोधन विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ( G Kishan Reddy ) ने कहा, आज देश और पूरी दुनिया को आतंक के खतरे से निपटना है। ऐसे में एनआईए संशोधन विधेयक को लाने का उद्देश्य जांच एजेंसी को और मजबूत बनाना है।' आइए इन 10 बिंदुओं में जानें संशोधन बिल के तहत NIA के बढ़े अधिकारों के बारे में-

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1.संशोधन के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी का अधिकार क्षेत्र देश से लेकर विदेश तक बढ़ जाएगा। संशोधित बिल के तहत राष्ट्रीय जांच एजेंसी को भारत से बाहर किसी गंभीर अपराध के मामले का पंजीकरण करने और जांच का निर्देश देने का प्रावधान किया गया है।

2. संशोधित बिल में NIA को आतंक के अलावा मानव तस्करी से जुड़े मामलों की जांच के अधिकार देने की बात कही गई है।

3. NIA की जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है। अब NIA साइबर अपराध से जुड़े मामलों की भी जांच कर सकेगी।

4. संशोधन विधेयक में NIA को अधिकार दिए गए हैं कि वह ऐसे व्यक्तियों को भी जांच के घेरे में रख सकती है, जो भारत के बाहर भारतीय नागरिकों के खिलाफ या भारत के हितों को प्रभावित करने वाला अनुसूचित अपराध करते हैं।

5. 'एनआईए संशोधन विधेयक 2019' ( NIA Amendment Bill 2019 ) बिल में NIA के अधिकारियों को वैसी शक्तियां, कर्तव्य, विशेषाधिकार और दायित्व प्रदान करने की बात कही गई है, जो अपराधों की जांच के संबंध में देश में पुलिस को दिए जाते हैं। इसके तहत NIA केवल भारत में ही नहीं, बल्कि देश के बाहर भी इन अधिकारों का प्रयोग कर सकती है।

6. NIA को जाली मुद्रा से संबंधित अपराधों की जांच का अधिकार भी होगा।

7. राष्ट्रीय जांच एजेंसी को विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 के अंतर्गत आने वाले अपराधिक मामलों की जांच करने में सक्षम बनाया गया है।

8. इसके अलावा प्रतिबंधित हथियारों के निर्माण या बिक्री के संबंध में होने वाले अपराधों की भी जांच अब NIA कर सकेगी।

9.संशोधित बिल एनआईए के दायरे में आने वाले अपराधों या तथाकथित अनुसूचित अपराधों के लिए स्पेशल ट्रायल कोर्ट के निर्माण की भी अनुमति देता है।

10. राष्ट्र की सुरक्षा को लेकर लाए गए इस संशोधित बिल पर लोकसभा में सभी पार्टियां एक मत हो गईं थी। जिसका नतीजा है कि बिल पर 278 के मुकाबले विरोध में मात्र 6 वोट पड़े।

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कब हुआ था NIA का गठन

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NIA यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी का गठन 2008 में किया गया था। 31 दिसंबर 2008 संसद की ओर से पारित अधिनियम 'राष्ट्रीय जांच एजेंसी विधेयक 2008' के लागू होने के साथ यह संस्था अस्तित्व में आई थी।

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इसके गठन के पीछे की सबसे बड़ी वजह 2008 का मुंबई आतंकी हमला था। हमले के बाद आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए भारत सरकार को एक केंद्रीय एजेंसी की जरूरत महसूस हुई थी, जिसके बाद इसकी स्थापना की गई।

NIA देश में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए सरकार की ओर से स्थापित एक संघीय जांच एजेंसी है।

यह केंद्रीय आतंकवाद विरोधी कानून प्रवर्तन एजेंसी के रूप में कार्य करती है। NIA राज्यों से बिना किसी अनुमती के राज्यों में होने वाले आतंक संबंधी अपराधों से निपटने का अधिकार रखती है।

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