टेरर फंडिंग मामले में एनआईए ने आतंकी सैय्यद सलाहुद्दीन के बेटों से की पूछताछ

टेरर फंडिंग मामले में एनआईए ने आतंकी सैय्यद सलाहुद्दीन के बेटों से की पूछताछ

हैरानी की बात यह है कि आतंकी सलाहुद्दीन का पूरा परिवार कश्मीर में रह रहा है। जबकि वे खुद इस्लामाबाद से गतिविधियां चलाता है।

नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (NIA) की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल हिजबुल मुजाहिदीन प्रमुख आतंकी सलाहुद्दीन के चारों बेटों से एजेंसी ने पूछताछ की है। जम्मू-कश्मीर में टैरेर फंडिंग मामले को लेकर हुई यह पूछताछ दिल्ली स्थित NIA के मुख्यालय में हुई है। मामले में एनआईए ने कुछ दिन पहले ही आतंकी संगठन के प्रमुख के एक बेटे शाहिद यूसुफ को गिरफ्तार किया था, जो न्यायिक हिरासत में है।

आतंकी सैय्यद सलाहुद्दीन ने 1991 में हिजबुल मुजाहिद्दीन का सरगना बनने के बाद अपना यह नाम रखा था। उसका वास्तविक नाम सैय्यद मुहम्मद यूसुफ है। हैरान करने वाली बात यह है कि उसका पूरा परिवार आज भी घाटी में रह रहा है।

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार- आतंकी सलाहुद्दीन ने इस्लामाबाद में जम्मू-कश्मीर रिलीफ ट्रस्ट बना रखा है। यहीं से वे अपनी गतिविधियों को अंजाम देता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसी जगह पर आईएसआई के कर्नल जुनैद, कर्नल सुल्तान और मेजर आमिर, सलाहुद्दीन से अक्सर मिलने जाते थे।

बता दें, अमरीका ने 2017 में सलाहुद्दीन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकी घोषित किया हुआ है। यह ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमरीकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की मुलाकात से कुछ समय पहले ही की गई थी। यही कारण है कि हिजबुल इसे अमरीका की भारत को खुश करने की नीति करार देता है।

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रिपोर्ट के अनुसार- आतंकी सलाहुद्दीन पाकिस्तान की मदद से भारत के अन्य हिस्सों और खासकर कश्मीर में आतंकी गतिविधियों का संचालन करता है। बता दें, टेरर फंडिंग मामले को लेकर एनआईए कश्मीर में पहले भी कुछ लोगों पर चार्जशीट दायर कर चुकी है। इनमें घाटी के कुछ कारोबारियों का नाम भी सामने आया था।

नगालैंड के पूर्व सीएम से भी हुई थी पूछताछ
दो दिन पहले ही टेरर फंडिंग मामले को लेकर एजेंसी ने नगालैंड के पूर्व सीएम टीआर जेलियांग से भी पूछताछ की है। उन्हें एनएससीएन (के), एनएससीएन (आइएम) और नगा नेशनल काउंसिल की ओर से कथित रूप से 14 सरकारी दफ्तरों से कथित रूप से फिरौती वसूलने के मामले में पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया गया था।

गौर हो, मामले को लेकर 18 जनवरी 2017 को एनआइए ने नगालैंड के कई सरकारी कार्यालयों पर छापा मारा था। इस दौरान कुछ ऐसे दस्तावेज सामने आए, जिसने खुलासा हुआ कि लगभग दो करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान आतंकी संगठनों को किया गया है।

 

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