दोषियों को फांसी मिलते ही निर्भया के गांव में जश्न, 16 साल की उम्र में आखिरी बार गई थी गांव

  • Nirbhaya Case Verdict Impact : यूपी के बलिया से करीब 45 किमी दूर मेडौला कलां की रहने वाली थी निर्भया
  • निर्भया के चेचेरे दादा ने इंसाफ मिलने पर जताई खुशी, गुनहगारों के गांव में सन्नाटा

नई दिल्ली। 7 साल, 3 महीने और 4 दिन के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार निर्भया (Nirbhaya Case) के अपराधियों को फांसी दे दी गई। इससे न सिर्फ उसके परिजन बल्कि पूरे गांव के लोग खुश है। इसे लेकर निर्भया के गांव मेडौला कलां में जश्न (celebration) का महौल है। लोगों ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर बधाइयां दी। साथ ही निर्भया के दादा ने कहा कि दोषियों (Nirbhaya Accused) को सजा मिलते ही काली रात के बाद सवेरा हो गया।

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मालूम हो कि निर्भया बलिया (Baliya) जिला मुख्यालय से 45 किमी दूर मेडौला कलां की रहने वाली थी। उसके चाचा सुरेश सिंह ने बताया कि निर्भया (Nirbhaya) के पिता शादी के बाद करीब 25 साल पहले दिल्ली शिफ्ट हो गए थे। ऐसे में निर्भया आखिरी बार गांव में लगभग 16 साल की उम्र में आई थी। वह पढ़ने में बहुत होशियार थी। वह डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना चाहती थी, लेकिन उसके साथ हुई दरिंदगी (gang rape) ने उसके सारे सपनों को चूर-चूर कर दिया। इस सिलसिले में निर्भया के चचेरे दादा शिवमोहन ने कहा कि वह बहुत चुलबुली थी। उसके घर आते ही खुशहाली आ जाती थी।

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निर्भया के साथ जब ये हादसा हुआ था तो इसकी खबर सुनकर सभी हैरान रह गए थे। दोषियों को सजा दिलाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा, लेकिन इंसाफ मिलते ही काली रात के बाद सवेरा हो गया। इससे दूसरे लोगों को भी सबक मिलेगा। साथ ही दोषियों को फांसी (Fasi) की सजा देने से लोगों का कानून पर भरोसा बढ़ेगा। इससे लड़कियों में भी आत्मविश्वास पैदा होगा। खुशी के इस मौके को खास बनाने के लिए पूरे गांव में मिठाइयां बांटी गईं। वहीं गुनहगारों के गांवों में सजा के बाद सन्नाटा पसरा दिखा। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से 20 किमी दूर जगन्नाथपुर गांव में रहने वाले दोषी विनय शर्मा के गांव में लोग चुप्पी साधे दिखाई दिए। हालांकि कुछ लोगों को उसकी फांसी पर दुख भी है। उनका कहना है कि गांव का लड़का था इसलिए सजा दिए जाने से तकलीफ तो होती हैं। दूसरे अपराधियों को मिली फांसी पर गांव में मिलाजुला महौल देखने को मिला। कुछ लोगों ने सजा का समर्थन किया तो वहीं कुछ न इस पर विरोध जताया है।

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Soma Roy Content Writing
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