Coronavirus ही नहीं और भी बीमारियां हैं, जिनकी अब तक नहीं मिली कोई पुख्त Medicine

  • Coronavirus के अलावा और भी बीमारियां हैं जिनकी नहीं मिली सटकी दवा
  • HIV Aids से लेकर Sars तक की बीमारियों का नहीं मिला इलाज

नई दिल्ली। पूरा विश्व इस वक्त कोरोना वायरस ( coronavirus ) जैसी महामारी से जूझ रहा है। भारत से लेकर दुनिया के हर कोने में इस कोविड 19 ( Covid 19 ) से बचने के लिए दवा बनाने की कोशिशें जारी हैं। हालांकि अब तक कोई बड़ी सफलता हाथ नहीं लगी है। कुछ दावें जरूर हुए हैं, लेकिन अब तक उनको लेकर भी संशय बरकरार हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोरोना वायरस जैसी बीमारी के वैक्सीन को तैयार होकर बाजार तक आने में कम से कम एक से दो साल लग सकते हैं।

ऐसे में जरूरी है कि लोग अब कोरोना के साथ जीने की आदत डाल लें। लेकिन क्या आप जानते हैं सिर्फ कोरोना वायरस ही नहीं बल्कि कुछ अन्य बीमारियां भी हैं जो अब तक पुख्ता इलाज का इंतजार कर रही हैं।

दुनियाभर में कोरोना वायरस का वैक्सीन बनाने की कवायद चल रही है। हर देश इसकी दवा बनाने में जुटा है। लेकिन इस बीच हम आपको बता दें कि ऐसी और भी कई बीमारियां जिनकी अब तक कोई पुख्ता दवा नहीं मिली।

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HIV एड्स वायरस
एचआईवी एड्स वायरस जिसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था। इस वायरस के बार में करीब 30 साल पहले वैज्ञानिकों को पता चला था। लेकिन तीन दशक के बाद भी इस बीमारी को लेकर अब तक कोई पुख्त इलाज सामने नहीं आ पाया है।

3.2 करोड़ लोगों ने गंवाई जान
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, इस घातक वायरस के कारण अभी तक दुनियाभर में 3.2 करोड़ लोगों की जान जा चुकी है। HIV वायरस ने भी लोगों की जीवनशैली पर बहुत बुरा असर डाला था। इस वायरस की भी अब तक कोई सटीक दवा नहीं मिली है। सिर्फ परहेज के जरिए ही इस बीमारी से बचा जा सकता है।

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एवियन इन्फ्लूएंजा का खौफ
करीब बीस साल पहले 90 के दशक के अंतिम दौर में एवियन इन्फ्लूएंजा (Bird Flu) का खौफ भी दुनिया का कई देशों में आसानी देखा गया। इस फ्लू ने भी कई लोगों को अपनी चपेट में लिया। एवियन इन्फ्लूएंजा चिड़ियों के मल से इंसानों में फैलता है।

1997 में H5N1 वायरस का सबसे पहले संक्रमण हांगकांग में पता चला था, जिसके कारण वहां लाखों की तादाद में मुर्गियों को मारा गया था। इसके बाद यह वायरस अफ्रीका, एशिया और यूरोप के करीब 50 से ज्यादा देशों में फैलते हुए भारत भी पहुंचा।

इस वायरस की मृत्युदर करीब 60 फीसदी तक है। WHO के मुताबिक, वर्ष 2013 और 2017 के बीच एवियन इन्फ्लूएंजा संक्रमण के कुल 1565 मामले सामने आए हैं, जिसमें से 39 फीसदी संक्रमितों की मौत हो गई थी। इस वायरस का भी अभी तक सटीक इलाज नहीं आया।

कोरोना परिवार का सार्स वायरस
सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम यानी सार्स वायरस भी कोरोना परिवार ( Coronavirus Family ) का ही है। myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. नबी वली के मुताबिक 2003 में पहली बार इसका पता चला।

माना जाता है कि यह वायरस चमगादड़ों के जरिए इंसान में पहुंचा। चीन के गुआंगजू प्रांत में 2002 में संक्रमण का पहला मामला सामने आया था। 2003 में 26 देशों के करीब 8000 से ज्यादा लोग सार्स वायरस से संक्रमित हो गए थे, जिसमें 916 लोगों की मौत हो गई थी। मृत्युदर 11 फीसदी के आसपास है। फिलहाल कम संक्रमण मामलों की वजह से इसकी वैक्सीन पर ज्यादा काम नहीं हुआ है।

मर्स कोव वायरस
यह वायरस भी कोरोना परिवार का एक प्रकार है। इसकी जानकारी 2012 में सामने आई। इस बीमारी में मृत्युदर सबसे अधिक है। नवंबर 2019 तक दुनियाभर में इससे 2494 लोग संक्रमित हो चुके हैं और करीब 858 लोगों की जान जा चुकी है।

इस वायरस का सबसे पहला मामला सऊदी अरब में सामने आया। अब तक 27 देशों में यह वायरस फैल चुका है। मर्स कोव वायरस के अरबी ऊंटों से इंसान में पहुंचने की बात सामने आ है। इस संक्रमण के भी ज्यादा फैलाव ना होने की वजह से अब तक इसकी भी वैक्सीन नहीं बनी।

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धीरज शर्मा Reporting
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