Coronavirus: एक दिन में कोरोना संक्रमितों की संख्या में बड़ा उछाल, 6 हजार से ज्यादा नए मामले आए सामने

Highlights

  • सरकार का दावा- दूसरे देशों के मुकाबले भारत की स्थिति बेहतर
  • स्वास्थ्य कर्मियों के पृथक-वास के नियमों में सरकार ने किए बदलाव
  • शुक्रवार को स्वास्थ्य कर्मियों ने नए नियमों का किया विरोध

देश में कोरोना (Coronavirus) संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कोरोना के एक दिन में बढ़ने वाली मामलों में एक बार फिर बड़ा उछाल देखने को मिला है। एक दिन में कोरोना संक्रमण के 6 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 1.22 लाख तक पहुंच गई है। सरकार का दावा है कि देश में लागू लॉकडाउन (Lockdown) के कारण ही देश में मरीजों की संख्या बाकी देशों के मुकाबले बेहद कम है। लॉकडाउन ना होता, तो यह संख्या इससे कई गुना ज्यादा होती।

दुनिया में 51 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित

बता दें, चीन में दिसंबर में कोविड-19 (Covid-19) का पहला मामला सामने आया था। उसके बाद यह वायरस पूरी दुनिया में फैल गया। अब तक दुनिया भर में 51.3 लाख लोग इस जानलेवा वायरस से संक्रमित हुए हैं जबकि करीब 3.3 लाख लोग की इसके संक्रमण के कारण मौत हुई है।

50 हजार से ज्यादा लोग हुए स्वस्थ

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार- पिछले 24 घंटे में कोरोना के कारण 148 लोगों की जान चली गई है। इससे देश में कोरोनो से जान गंवाने वालों की संख्या 3583 तक पहुंच गई है। जबकि इस दौरान संक्रमण के 6,088 नए मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार- देश में 66,330 संक्रमित लोगों का उपचार चल रहा है और इनमें से 48,533 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। मंत्रालय की ओर से शुक्रवार रात को जारी आंकड़ों के अनुसार- देश में कोरोना मामलों की कुल संख्या 1,22,656 हो चुकी है। जबकि 3,634 लोगों की मौत हुई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार- इलाज के बाद 51,000 से ज्यादा लोग स्वस्थ हो चुके हैं।

दिल्ली में एक दिन में 600 से ज्यादा मामले

मंत्रालय के अनुसार- दिल्ली में एक दिन में कुल 660 नए मामले आए हैं। राजधानी में कोरोना मरीजों की कुल संख्या 12,319 हो गई है। बता दें, दिल्ली में कोरोना के कारण अब तक 208 लोगों को जान गंवानी पड़ी है।

नियमों में बदलाव का विरोध

लॉकडाउन के चौथे चरण में सरकार ने स्वास्थ्यकर्मियों के नियमों में कुछ बदलाव किए हैं। जिनका उन्होंने विरोध किया है। शुक्रवार को स्वास्थ्य कर्मियों के पृथक-वास के नियमों में किए गए बदलावों के विरोध में केंद्र एवं शहर के विभिन्न अस्पतालों के डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी हाथ पर काली पट्टी बांधकर काम पर पहुंचे।

'स्वास्थ्य कर्मियों को पृथक-वास में भेजने की जरूरत नहीं'

नियमों में बदलाव करते हुए अब सरकार ने यह कहा है कि कोरोना मरीजों का इलाज करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को अब पृथक-वास में भेजने की जरूरत नहीं है, जब तक कि उन्हें बहुत ज्यादा खतरा हो या फिर उनमें वायरस संक्रमण के लक्षण नजर आ रहे हों। इस आदेश के बाद जिन स्वास्थ्य कर्मियों के रहने की व्यवस्था होटलों में की गई थी, उन्हें जगह खाली करने को कहा गया है। ऐसा नहीं करने पर तय तिथि के बाद से वहां रुकने पर आया खर्च उनके वेतन से काटा जाएगा।

15 मई को जारी किए गए थे नए दिशा-निर्देश

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से 15 मई को नए दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इनके अनुसार- कोविड-19 ड्यूटी पर लगे स्वास्थ्य कर्मियों को पृथक-वास में तभी भेजा जाएगा जब उनके पीपीई के साथ कुछ गड़बड़ी हो गई हो, या फिर वे अत्यधिक खतरे की जद में आ गए हों या फिर उनमें कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण नजर आ रहे हों।

Navyavesh Navrahi
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