ओडिशा: WSO का दावा, 12 वर्षों में सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व से 75 बाघ गायब

यह बात सामने आई है कि सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व में बीते 12 वर्षों में 75 बाघ खत्म हो गए हैं। यदि औसतन देखा जाए तो हर वर्ष करीब 6 बाघ खत्म हुए हैं।

मयूरभंज। देश और दुनिया में बाघों की घटती संख्या को फिर से बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन ओडिशा से एक ऐसी खबर सामने आई है जिससे चिंताएं काफी बढ़ गई है। दरअसल ओडिशा के मयूरभंज जिले में राज्य का सबसे अधिक बाघों की संख्या है। मयूरभंज के सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व में बाघों के रखरखाव, उसकी सुरक्षा और संख्या बढ़ाने के लिए तमाम तरह के उपाय किए गए हैं। लेकिन इसके बावजूद भी एक एसी रिपोर्ट सामने आई है जिससे बाघों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई है। यह बात सामने आई है कि सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व में बीते 12 वर्षों में 75 बाघ खत्म हो गए हैं। यदि औसतन देखा जाए तो हर वर्ष करीब 6 बाघ खत्म हुए हैं।

ओडिशा सरकार ने किया दावा

आपको बता दें कि ओडिशा सरकार ने एक रिपोर्ट जारी किया है। ओडिशा सरकार के अनुसार वर्ष 2016 में पुगमार्क और कैमरा ट्रैप तकनीक के उपयोग से बाघों की अंतिम जनगणना में मयूरभंज में 28 बाघों की उपस्थिति दर्शाई गई थी। लेकिन अब वाइल्डलाइफ सोसाइटी ऑफ ओडिशा (WSO) ने दावा किया है कि 2006 में सिमिलिपाल में 101 बाघ थे, जबकि अब अवैध शिकार के कारण बाघों की संख्या घटकर 28 रह गई है। बीते 12 वर्षों में 75 बाघ गायब हो गए हैं। WSO के सचिव विश्वजीत मोहन्ती ने कहा है कि यह एक अच्छा संकेत नहीं है। क्योंकि बीते दशक में सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व में बाघों को बचाने और उसकी संख्या को बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं। बता दें कि सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व काले बाघ के लिए प्रसिद्ध है और विश्व में यह इकलौता स्थान है जहां पर गहरे रंग के बाघों का प्राकृतिक आवास है।

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100 करोड़ रुपए से ज्यादा हुआ है खर्च

आपको बता दें कि मोहन्ती ने बताया कि सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व के लिए हर वर्ष बाघों की सुरक्षा पर केंद्र सरकार 5-6 करोड़ रुपए खर्च करती है। बीते 12 वर्षों में राज्य और केंद्र सरकार की ओर से 100 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मौजूदा समय में बाघों के अवैध शिकार की घटनाएं भी बढ़ गई है। अब इसके लिए किसे जिम्मेदार माना जाएगा?मोहन्ती ने आगे कहा कि सिमिलिपाल में किसी भी तरह की अवैध गतिविधि की इजाजत नहीं दी जा सकती है, इसके लिए उन्होंने इस बारे में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि यह हमारा मयूरभंज और सिमिलिपाल है। इसलिए यह हमारी जिम्मेदारी है कि उच्च और संबंधित अधिकारियों तक यह सूचना पहुंचाई जाए। उन्होंने आगे यह भी कहा कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी बिल्ली की आबादी में वृद्धि का संकेत दिया था, लेकिन ओडिशा में गिरावट देखी गई।

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Anil Kumar
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