Coronavirus: सेना के हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियों में मास्क और सैनेटाइजर बनने शुरू

  • आपातकालीन जरूरत के लिए डॉक्टरों की सुरक्षा में काम आने वाले पीपीई भी यहां बनाने के आदेश।
  • पहले आर्डर के तहत 2 लाख मास्क, 5 हजार पीपीई और इतने ही सैनेटाइजर तैयार करने को कहा गया
  • भारतीय ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड के सचिव ने सात आयुध कारखानों को जारी किए इसके आदेश।

मुकेश केजरीवाल/नई दिल्ली। जिन फैक्ट्रियों में हथियार और सेना की जरूरत के दूसरे सामान बनाए जाते थे, उनमें अब फेस मास्क, हैंड सैनेटाइजर और डॉक्टरों व नर्सों की सुरक्षा में काम आने वाले पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) बनाए जाने लगे हैं। देश में इन सामान की पहले से ही कमी बनी हुई है और ऐसे में अचानक कोई आपात स्थिति पैदा हो गई तो इन्हें इलाज करने वाले डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को तुरंत उपलब्ध करवाया जा सकेगा।

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भारतीय ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड के सचिव विवेक सी वर्मा ने अपने सात आयुध कारखानों को मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। ‘पत्रिका’ के पास उपलब्ध इस पत्र में उन्होंने कोविड-19 (कोरोना) के संबंध में तुरंत काम करने का निर्देश दिया है। इन्होंने कहा है कि पूरे देश में कोरोना की वजह से जो स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति बनी है उससे निपटने के लिए आयुध फैक्ट्रियों को जुट जाना है।

ordnance factory board letter

पहला आर्डर 2 लाख मास्क का

इन फैक्ट्रियों को पहले आर्डर के तहत 2 लाख मास्क, 5 हजार पीपीई और इतने ही सैनेटाइजर तैयार करने को कहा गया है। यह आदेश जारी होने से पहले ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों में इन सामान को तैयार किए जाने की संभावना का आकलन किया गया था। इसके बाद आदेश मिलते ही सभी संबंधित फैक्ट्रियों में इन्हें बनाने के लिए जरूरी सामान की खरीद भी शुरू कर दी गई है।

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वेंटिलेटर को ले कर भी तैयारी

बोर्ड के एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया कि मौजूदा हालात से निपटने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ नियमित तालमेल बना हुआ है। इसने वेेंटिलेटर की जरूरत भी बताई है, जिसके बारे में बहुत जल्दी ही फैसला लिया जा सकता है। इन दिनों विभिन्न अस्पतालों में पीपीई की भी कमी देखने को मिल रही है। इलाज के दौरान सर से ले कर पैर तक पूरे शरीर को ढकने के लिए इसका उपयोग होता है, ताकि स्वास्थ्य कर्मी संक्रमण से बच सकें।

अमित कुमार बाजपेयी
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