कोरोना संकट के दौर में पटना हाईकोर्ट से आरोपियों को अनोखी शर्तों के साथ मिल रही जमानत

Highlights

- बिहार (Bihar) में कुछ आरोपियों को जमानत के लिए पीएम केयर्स फंड में राशि दान करने का आदेश, अब तक करीब तीन लाख राशि जमा हुई.

- शराब के साथ गिरफ्तार आरोपियों से 15 से 25 हजार रुपये पीएम केयर्स फंड (PM CARES FUND) में जमा कराने के बाद पटना हाईकोर्ट ने दी जमानत.

- एक अन्य आरोपी को कोरोना (Coronavirus) अस्पताल में सेवाभाव करने और दूसरे को सिविल कोर्ट में आगन्तुकों का तापमान जांचने की अनोखी सजा मिली.

नई दिल्ली/पटना।

संतोष सहनी और रघुबीर सहनी बिहार (Bihar) में मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) जिले के रहने वाले हैं। पिछले साल अक्टूबर में बिहार पुलिस (Bihar Police) ने उन्हें 1372 लीटर विदेशी शराब के साथ पकड़ा था। पुलिस का आरोप है कि संतोष और रघुबीर एक कमर्शियल वाहन से शराब की अवैध रूप से सप्लाई करने के लिए जा रहे थे। इसके बाद से ही दोनों जेल में बंद थे। बीते 29 मई दिन शुक्रवार को उनके वकील ने दोनों की जमानत के लिए पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) में याचिका दायर की। हाईकोर्ट (High Court) ने संतोष और रघुवीर को जमानत तो दी, लेकिन अनोखी शर्त के साथ। जी हां, यह शर्त थी कि उन्हें अपनी कुल जमानत-मुचलके की राशि में से 25 हजार रुपये पीएम केयर्स फंड (PM CARES FUND) में दान करना होगा।

बता दें कि बिहार में अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है। इसके तहत राज्य में शराब की खरीद-बिक्री और इसके सेवन पर पूरी तरह प्रतिबंध है। आरोप सिद्ध होने पर दोषी को 10 साल जेल की सजा हो सकती है। पटना हाईकोर्ट ने संतोष और रघुबीर के अलावा एक और आरोपी रौशन कुमार को 15 हजार रुपये की राशि पीएम केयर्स फंड में जमा कराने का आदेश सुनाया है। रौशन गत जनवरी में भागलपुर में 382 लीटर विदेशी शराब के साथ पकड़ा गया था।

यह फैसला पटना हाईकोर्ट के जस्टिस अंजनी कुमार शरण (Justice Anjani Kumar Sharan) ने सुनाया है। जस्टिस शरण ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई इस सुनवाई में संतोष और रघुवीर को 25 हजार रुपये पीएम केयर्स फंड में जमा कराने के साथ ही 20 हजार रुपये की जमानत राशि और 20 हजार रुपये का दो निजी मुचलका भरने के बाद जमानत दी है।

यह पहला मामला नहीं
ऐसा नहीं है कि पटना हाईकोर्ट ने किसी आरोपी के लिए पहली बार बतौर जमानत पीएम केयर्स फंड में दान करने का फैसला सुनाया है। रौशन, संतोष और रघुवीर के अलावा पटना हाईकोर्ट से कुछ दूसरे आरोपियों को भी पीएम केयर्स फंड में दान करने की यह अनोखी सजा दी जा चुकी है। एक अन्य केस में ट्रक पकड़े जाने के बाद आरोपी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगा। वहीं, कुछ दूसरे मामलों में 5 हजार से 10 हजार रुपये की अलग-अलग राशि आरोपियों से जमा करने को कही गई। ऐसी अनोखी सजा से अब तक करीब 3 लाख रुपये की राशि पीएम केयर्स फंड में जमा हुई है।

दूसरी अनोखी सजाएं भी मिली
राज्य में इससे पहले भी विभिन्न कोर्ट से अलग-अलग मामलों के दूसरे आरोपियों को कोरोना संकट के दौर में सेवाभाव से जोडऩे के लिए अनोखी सजाएं दी जा चुकी हैं। एक मामला बिहार के बेगुसराय जिले का है। यहां अनुसूचित जाति-जनजाति (एससी-एसटी) वर्ग से जुड़ा एक मामला सामने आया। इसमें आरोपी मनोज कुमार को जमानत इस शर्त पर दी गई कि वह 3 महीने तक कोरोना अस्पताल में सेवा करेगा। वहीं, एक अन्य मामला पटना का है। यहां एक बिल्डर को सजा दी गई कि वह सिविल कोर्ट में आने वाले लोगों के तापमान नापेगा।

झारखंड हाईकोर्ट भी दे चुका है ऐसा आदेश
इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने भी जमानत के लिए ऐसी अनोखी शर्त दूसरे आरोपियों के सामने रखी थी। तब एक मामले में आरोपी भाजपा सांसद सोम मरांडी और पांच अन्य को 35 हजार रुपये पीएम केयर्स फंड में जमा कराने का आदेश दिया गया था। मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस अनुभा रावत चौधरी ने उन्हें आरोग्य सेतु एप भी अपने-अपने मोबाइल में डाउनलोड करने को कहा। भाजपा सांसद और उनके पांच अन्य साथियों को राज्य में रेल संचालन में बाधक बनने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

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Ashutosh Pathak
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