पत्रिका कीनोट सलोन में बोले फैशन डिजायनर आसिफ शाह- कोरोना के बाद बदलेगा फैशन इंडस्ट्री का स्टाइल

पत्रिका कीनोट में सवालों के जवाब देते हुए मशहूर फैशन डिजायनर आसिफ शाह ने कहा, फैशन एक एसेंशियल कमोडिटी नहीं है जिसे लोग हर दिन काम में लेने वाले हैं। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि कोरोना से सबसे ज़्यादा प्रभावित फैशन इंडस्ट्री हुई है।

नई दिल्ली। पत्रिका कीनोट सलोन में मशहूर फैशन डिजायनर आसिफ शाह ने कहा कि इस समय फैशन इंडस्ट्री सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। ऐसे में इसे सपोर्ट की जरूरत है, लेकिन हमें पूरा भरोसा है कि हम जल्द ही इससे उबरेंगे और एक नई वापसी करेंगे। यह बात पूरी तरह से तय है कि आने वाला वक्त पुराने जैसा नहीं होगा। कोविड के बाद देश की फैशन इंडस्ट्री में बड़े बदलाव दिखाई देंगे।

पत्रिका कीनोट में सवालों के जवाब देते हुए मशहूर फैशन डिजायनर आसिफ शाह ने कहा, फैशन एक एसेंशियल कमोडिटी नहीं है जिसे लोग हर दिन काम में लेने वाले हैं। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि कोरोना से सबसे ज़्यादा प्रभावित फैशन इंडस्ट्री हुई है। हमारे समर कलेक्शंस के ऑर्डर्स जनवरी से फरवरी माह तक तैयार होकर स्टोर्स तक पहुँच जाते हैं। अब जबकि ऑर्डर्स बनकर तैयार हैं, लेकिन बाजार बंद पड़ा हुआ है। तैयार ऑर्डर्स को किस तरह से काम में लेना है ये सबसे ज़्यादा चिंता का विषय हर डिजायनर के लिए बना हुआ है। डिजायनर्स के लिए मौजूदा समर कलेक्शन तो लगभग खत्म ही हो गया है। फिलहाल बस मंथन का दौर है, सभी डिजायनर्स वर्तमान सँभालने के साथ ही भविष्य में नई सोच और नई संभावनाओं को तलाश रहे हैं।

 

सरकारी सहयोग की जरूरत
आसिफ शाह ने कहा, कोरोना के झटके के लिए पहले से कोई तैयार नहीं था। ये 400 करोड़ के सालाना टर्नओवर की इंडस्ट्री है और 11.5 फ़ीसदी की दर से हर साल बढती है। ऐसे में इस इंडस्ट्री को दोबारा खडा करने में सरकार का हस्तक्षेप बेहद ज़रूरी हो गया है। एफडीसीआई भी इस सन्दर्भ में सरकार से सहयोग के लिए बातचीत की कवायद कर रहा है।

बदलेगा ड्रेस मटेरियल, मास्क भी होगा फैशन का हिस्सा
उन्होंने कहा कि मास्क अब ज़िन्दगी का हिस्सा बन गया है, इसे देखते हुए हमने ओरगेनिक फेब्रिक से मास्क बनाने पर काम शुरू कर दिया है। भविष्य की शादियों को देखते हुए फिलहाल वर-वधु को छोड़कर शादी समारोह में शिरकत करने वाले लोगों के लिए के लिए ऐसे मास्क बनाए जा रहे हैं, जो उनके चहरे को कवर करते हुए सुरक्षा के साथ उनकी ड्रेस के साथ मैच भी करे। अब विशेष रूप से तैयार ड्रेसेज आने वाली है जो इको फ्रेंडली और ओरगेनिक थ्रेड के इस्तेमाल से बनेंगी। साथ ही इन ड्रेसेज को एक बार पहनने के बाद आसानी से सेनेटाइज भी किया जा सकेगा। अब चाहे लहंगा हो या कोई और ड्रेस, ज़्यादा जोर वन पीस ड्रेस बनाने पर ही रहेगा, जिसे जो कोई पहनेगा वो वापस घर आकर आसानी से उसे सेनेटाइज कर सकेगा।

बदलेगा फैशन ट्रेंड
पहले डिजायनर्स जो कुछ डिजायन करते थे उसकी कीमत लगती थी, पर अब बदले परिप्रेक्ष्य में जब ड्रेस डिजायनिंग लोगों की प्राथमिकता में नहीं रहेगी, ऐसे में रीटेल डिमांड के आधार डिजायनर्स को काम करना होगा। ऐसे में मैटेरियल और फैब्रिक में भी बदलाव करने होंगे। कम खर्चीली ड्रेस बनाने के लिए हलके फैब्रिक का इस्तेमाल करना होगा।

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Prashant Jha
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