केरल में एक गांव ऐसा भी जहां बाढ़ के बाद श्मशान में रहने को मजबूर हैं लोग

केरल में एक गांव ऐसा भी जहां बाढ़ के बाद श्मशान में रहने को मजबूर हैं लोग

अलपुज्झा के कैनिकारी गांव में लोग अपने जानवारों की वजह से श्मशान में रहने के लिए मजबूर हैं।

तिरुवनंतपुरम। केरल के हालात अब धीरे-धीरे ठीक हो रहे हैं, लेकिन अभी भी हजारों की संख्या में लोग अपने घरों से दूर हैं और बाढ़ की वजह से कहीं ना कहीं फंसे हुए हैं। बीते 8 अगस्त से केरल में आई भीषण बाढ़ की वजह से लोगों को कितना परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है, इसका अंदाजा शायद वहीं लोग लगा सकते हैं। कहा जा रहा है कि धीरे-धीरे अब पानी का स्तर कम हो रहा है, लेकिन अभी भी प्रशासन के सामने दिक्कतों का पहाड़ है।

बेजुंबा जानवरों की वजह से लोग रह रहे हैं श्मशान में

इस बीच ऐसी जानकारी मिली है कि केरल के कुछ इलाकों में लोग राहत शिविर में ना रहकर श्मशान में रहने के लिए मजबूर हैं और ऐसा एक मजबूरी की वजह से हो रहा है। दरअसल, बेजुंबा जानवरों की मजबूरी की वजह से ये लोग मुर्दों के बीच में रहना पड़ रहा है, क्योंकि राहत शिविरों में तो जानवरों को लेकर रहना संभव नहीं था, इसलिए इन लोगों ने श्मशान का सहारा लेना पड़ा।

अलपुज्झा के एक गांव के लोगों ने राहत शिविर में जाने से किया इनकार
राज्य के 14 जिलों में से 12 जिलों की तस्वीर बेहद चिंताजनक है उन्हीं में से एक है अलपुज्झा। अलपुज्झा के कैनिकारी गांव में भारी बारिश के बाद पानी का स्तर लगातार बढ़ गया था। बाढ़ के पानी की वजह से लगभग पूरा गांव डूबने की कगार पर था। ऐसे में लोगों के पास कोई खास विकल्प नहीं था। लोगों को श्मशान में खुद के लिए उम्मीद नजर आ रही थी। बाढ़ पीड़ितों में से एक परिवार ने सरकारी मदद लेने से इंकार किया यानि राहत शिविर में जाने से इनकार किया। उस परिवार ने अपने पशुओं को छोड़कर सेंट मैरी चर्च के श्मशान में आसरा लिया।

डरने लगने की बात पर क्या कहते हैं गांववाले?

परिवार के लोगों से जब पूछ गया कि क्या उसे श्मशान में रहने से डर नहीं लगा तो उसका जवाब था कि एक न एक दिन सबको यहीं आना है तो डर कैसा। ये वो जगह है जहां उसके पिता, बड़ी बहन और दूसरे रिश्तेदारों को दफन किया गया। हमारे पास गाय और बकरियां थीं, उन्हें छोड़कर हम नहीं जा सकते थे। फिलहाल 20 ऐसे परिवार हैं जिन्होंने गांव को छोड़ना मुनासिब नहीं समझा। उन लोगों का भी आशियाना ये श्मशान बना हुआ है।

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