आधुनिकता को ताक में रखकर आज भी हिंदुस्तान का ये गांव कुछ इस तरह कर रहा अपनी परंपराओं की देखरेख

एक गाँव ऐसा बसा हैं जहां के लोग केवल संस्कृत में ही बात करते हैं।

नई दिल्ली। हमारा देश आधुनिकता की ओर जैसे-जैसे बढ़ रहा है वैसे-वैसे अपनी पुरानी सभ्यता और संस्कृति को भूलता जा रहा है। पुराने आचार-विचार,पहनावे,खान-पान सभी में बदलाव आ रहे हैं। पुराने ख्यालातों को लोग आजकल बैकडेटेड की संज्ञा देते हैं।

अंग्रेजी बोलचाल को आज के समय में आधुनिकता का प्रतीक माना जाता है और इस मॉर्डन होने की होड़ में आज की युवा पीढ़ी अपनी राष्ट्रभाषा को भूलती जा रही है और बात यदि भाषाओं की जनक यानि कि संस्कृत के बारे में की जाएं तो उसका तो जिक्र तक अब ज्य़ादातर नहीं होता है लेकिन आज एक ऐसे स्थान के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं जो कि आज भी अपनी परंपराओं और रीतियों को बहुत ही अच्छे ढग़ से संजोए हुए है।

Muruttu village

जी, हां कर्नाटक के शिमोगा शहर के कुछ ही दूरी पर एक गाँव ऐसा बसा हैं जहां के लोग केवल संस्कृत में ही बात करते हैं। शिमोगा शहर से लगभग दस किलोमीटर की दूरी पर बसे मुत्तुरु गांव अपनी इस विशिष्ठ पहचान को लेकर लोगों के बीच काफी चर्चे में हैं।

ये गांव तुंग नदी के किनारे बसा हुआ है और संस्कृत ही यहां बोलचाल की भाषा है। इस गांव में करीब पांच सौ परिवार रहते है और ये संस्कृत में बड़ी ही सहजता से बात करते हैं। जैसे ही आप इस गांव में प्रवेश करेंगे यहां के लोग आपसे पूछेंगे कि भवत: नाम किम्?" (आपका नाम क्या है?), हैलो की जगह "हरि ओम्", "कैसे हो" के स्थान पर "कथा अस्ति?" कुछ इस तरह से ही यहां लोग बात करते हैं।

 

Muruttu Village

चाहे आम बातचीत हो या झगड़ा सभी संस्कृत में ही किए जाते। यहां बच्चे भी इसी भाषा में बात करते हैं। कुछ इस तरह से ये गांव आज भी अपनी इस परंपरा को बड़ी ही सुंदरता से सहेजे हुए है। कर्नाटक जिले में बसा ये गांव आज उन सभी के लिए एक मिसाल है जो कि मॉर्डन बनने की अंधी चाह में अपने ही देश की विशिष्टताओं को भूलते जा रहे हैं।

 

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