शिंजो आबे संग पहली बार किसी मस्जिद में जाएंगे पीएम मोदी, अपनी नक्काशी के लिए दुनिया में है फेमस

ashutosh tiwari

Publish: Sep, 13 2017 04:18:00 (IST)

Miscellenous India
शिंजो आबे संग पहली बार किसी मस्जिद में जाएंगे पीएम मोदी, अपनी नक्काशी के लिए दुनिया में है फेमस

इस मस्जिद का निर्माण 1573 में मुगलों ने कराया था, सिदी सैय्यद मस्जिद की नक्काशी पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।

अहमदाबाद: प्रधानमंत्रनरेंद्र मोदी के बारे में हर कोई जानता है कि वो संघ के प्रचारक रहे हैं और अपने पूरे राजनीतिक जीवन में पीएम मोदी कई बार मंदिर और गुरुद्वारे गए हैं, लेकिन पीएम मोदी कभी किसी मस्जिद में नहीं गए हैं। लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार किसी मस्जिद में जाने वाले हैं। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ पीएम मोदी गुजरात की सियी सैयद्द मस्जिद जाएंगे। आपको बता दें कि जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे 2 दिन के भारत दौरे पर आ रहे हैं, जिनके साथ पीएम मोदी गुजरात जाएंगे, जहां वो देश की पहली बुलेट ट्रेन का शिलान्यास करेंगे।

पहली बार पीएम जाएंगे किसी मस्जिद
प्रधानमंत्री नरेंद्र अपने जीवन में पहली बार जिस मस्जिद में जाने वाले हैं वो अपने आप में खास है। हम आपको बताते हैं कि सिदी सैय्यद मस्जिद की ऐसी क्या खासियत है कि पीएम मोदी ने शिंजो आबे के साथ इसी मस्जिद में जाने का फैसला किया।

 

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सिदी सैय्यद मस्जिद से जुड़ी कुछ खास बातें...

'सिदी सैय्यद जाली' भी कहते हैं मस्जिद को
सिद सैय्यद मस्जिद अहमदाबाद के नेहरू पुल के पूर्वी छोर पर है। इस मस्जिद का निर्माण 1573 में मुगलों ने कराया था। सिदी सैय्यद मस्जिद की नक्काशी पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, जो कि मस्जिद के पश्चिमी छोर पर है। इन खिड़कियों को देखने से ये साधारण सी प्रतीत होती हैं, लेकिन इनकी खासियत यह है कि ये जाली पूरी तरह से पत्‍थर को तरासकर बनायी गयी है। खिड़की की जाली में एक पेड़ और उससे पूरी तरह से जुड़ी उनकी शाखाओं को दिखाया गया है। अपनी मशहूर जाले की वजह से ही इस मस्जिद को 'सिदी सैय्यद की जाली' के नाम से भी जाना जाता है।

मस्जिद की नक्काशी दुनिया में है मशहूर
दीवार की खिड़कियों पर एक-दूसरे से लिपटी शाखाओं वाले पेड़ को दिखाती ये नक्काशी पत्थर से तैयार की गयी हैं जो चांदी की जालियों जैसा दिखती हैं। हालांकि देश की बड़ी मस्जिदों में से एक दिल्ली की जामा मस्जिद से ये काफी छोटी है और इसके बीचों बीच खुली जगह का अभाव भी है, लेकिन नक्काशी के मामले में ये दुनिया की शीर्ष मस्जिदों में शुमार है।

 

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सिदी सैय्यद ने किया था मस्जिद का निर्माण
इस मस्जिद का निर्माण करने वाले सिदी सैय्यद को बादशाह अकबर ने अमीरुल हज बनाकर यहां भेजा था। सिदी सैय्यद यमन से आये थे और उन्होंने सुल्तान नसीरुद्दीन महमूद और सुल्तान मुजफ्फर शाह के दरबार में इस मस्जिद के लिए काम किया था। हालांकि मस्जिद को बनाते-बनाते ही सिदी सैय्यद का इंतकाल हो गया था और बताया जाता है कि उनके शव को इसी मस्जिद के अंदर दफना दिया गया था, लेकिन मस्जिद के अंदर कोई भी मजार या मकबरा नहीं है।

कौन थे सिदी ?
इतिहासकार बताते हैं कि जो लोग अफ्रीका से भारत आये थे उन्हें सिदी कहा जाता है। ये लोग शुरुआत में गुलाम बनकर भारत आये थे लेकिन बाद में ताकतवर होते चले गये और अपना वर्चस्व कायम कर लिया। इतिहासकार बताते हैं कि जहांगीर जैसे मुगल बादशाह ने अहमदाबाद को गर्दाबाद (धूल-गुबार का शहर) कहा था, लेकिन ये मस्जिद इस शहर की पहचान के तौर पर जानी जाती है। मस्जिद के जाली के बारे में बताया जाता है कि यह सिंगल पीस पत्‍थर नहीं है, बल्कि छोटे - छोटे पत्थरों को जोड़कर तैयार किया गया है। 9 गुणा 10 आकार की ये जाली दूर से सिंगल पीस लगती है. ये जाली अहमदाबाद की पहचान है।

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