मिदनापुर: पीएम मोदी की रैली में हुआ हादसे के पीछे ममता सरकार का 'हाथ', सुरक्षा से हुआ खिलवाड़

तीन सदस्यों वाली एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी ने इस हादसे के पीछे ममता सरकार की लापरवाही पाई है।

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में पीएम मोदी की रैली के दौरान हुए हादसे को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। दरअसल, इस मामले में तीन सदस्यों वाली एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी ने इस हादसे के पीछे ममता सरकार की लापरवाही पाई है। आपको बता दें कि पीएम मोदी की पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में आयोजित 'कृषि कल्याण समावेश' रैली के दौरान टेंट गिरने की वजह से बड़ा हादसा हो गया था, जिसमें 90 लोग घायल हो गए थे। इस हादसे की जांच के लिए अगले दिन पीएमओ और गृह मंत्रालय ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की थी। इस टीम ने मिदनापुर में जाकर पूरी हादसे की जांच की थी। जांच में अब ये बात सामने आई है कि ममता बनर्जी की सरकार की तरफ से की गई व्यवस्था में 'सिक्यॉरिटी प्रोटोकॉल के उल्लंघन' और 'व्यवस्था में गड़बड़ी' की वजह से ये हादसा हुआ था। हालांकि राज्य सरकार इस बात से पल्ला झाड़ती हुई नजर आ रही है।

सुरक्षा व्यवस्था में चूक की वजह से हुआ हादसा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच टीम ने पुलिस प्रशासन के मामले में कोऑर्डिनेशन की गंभीर कमी पाई गई है। तीन सदस्यीय जांच टीम में केंद्रीय सचिवालय में सुरक्षा सचिव, एस के सिन्हा भी सदस्य हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि रैली के दौरान 'सुरक्षा के कई पहलुओं' को नजरअंदाज किया गया था। हादसे के वक्त वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी भी नहीं थी। इसके अलावा यह भी देखा गया कि टेंट गिरने से बिजली चली गई थी, जिसके चलते पीएम के टेलीप्रॉम्पटर समेत सभी सिक्यॉरिटी गैजेट्स बंद हो गए थे। इसके बाद बाकी प्रोग्राम के दौरान सिर्फ माइक काम कर रहा था। सूत्रों ने बताया कि इस वजह से कुछ देर मोदी को बिना टेलीप्रॉम्टर देखे भाषण देना पड़ा था।

राज्य सरकार ने भी दिखाई ढिलाई

प्रधानमंत्री की इस रैली में बड़ी लापरवाही देखने को मिली। जिले और जोनल ऐडमिनिस्ट्रेशन में मौजूद ज्यादातर बड़े अधिकारी भी रैली स्थल से कम से कम 5-7 किमी की दूरी पर मौजूद थे और उनमें से किसी ने भी एसपीजी और केंद्र सरकार के अन्य अधिकारियों की तरफ से लगातार आ रही फोन कॉल का जवाब नहीं दिया। पीएम मोदी की रैली के दौरान टेंट गिरने से 90 लोग घायल हो गए थे। इनमें से कुछ की हालत बेहद गंभीर थी जिन्हें इलाज के लिए कोलकाता के किसी निजी अस्पताल में रेफर किया गया था। वहीं हादसे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद अस्पताल पहुंच कर घायलों का हालचाल पूछा था।

गृह मंत्रालय को सौंपी जाएगी जांच टीम की रिपोर्ट

जांच टीम की इस रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार अपना बचाव करते हुए नजर आ रही है। ममता सरकार की तरफ से कहा गया है कि रैली के दौरान सुरक्षा में किसी तरह की चूक नहीं हुई थी और न ही सिक्योरिटी प्रोटोकॉल को तोड़ने का किसी तरह का प्रयास किया गया था। जांच टीम अगले एक से दो दिन में अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है। गृह मंत्रालय की ओर से भेजी गई जांच टीम ने 'रूल बुक' में लिखे सभी नियमों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

Kapil Tiwari
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