मध्यप्रदेश में परिवार नियोजन के कमजोर शिविर

देश में जनसंख्या नियंत्रण के लिए सबसे मजबूत व जरूरी माने जाने वाले परिवार कल्याण कार्यक्रम की स्थिति मध्यप्रदेश में अच्छी नहीं चल रही है। इसके प्रमाण के तौर पर कुछ उदाहरण हैं। एक उदाहरण सतना में पिछले महीने हुए परिवार नियोजन के एक शिविर का है, जिसमें साधन सुविधाओं की आधारभूत कमी के कारण कुछ ऑपरेशन चिकित्सकों को मोबाइल और टॉर्च की रोशनी में करने पड़े।

प्रसंगवश. इंदौर. देश में जनसंख्या नियंत्रण के लिए सबसे मजबूत व जरूरी माने जाने वाले परिवार कल्याण कार्यक्रम की स्थिति मध्यप्रदेश में अच्छी नहीं चल रही है। इसके प्रमाण के तौर पर कुछ उदाहरण हैं। एक उदाहरण सतना में पिछले महीने हुए परिवार नियोजन के एक शिविर का है, जिसमें साधन सुविधाओं की आधारभूत कमी के कारण कुछ ऑपरेशन चिकित्सकों को मोबाइल और टॉर्च की रोशनी में करने पड़े।

दो उदाहरण पिछले महीने के ही छिंदवाड़ा जिले के हैं, जिनमें पहले में ऑपरेशनों की शुरुआत शाम ढलने के समय हुई। इसलिए कि चिकित्सक आए ही शाम को। लेकिन महिलाएं तो सुबह ही आ गई थीं। चूंकि ऑपरेशन के लिए पेट खाली रखना होता है, इसलिए महिलाओं को पूरे दिन भूखे रहकर ऑपरेशन का इंतजार करना पड़ा था। यह उनके लिए तकलीफदेह होता है। शारीरिक तौर पर भी और पारिवारिक तौर पर भी। उन्हें और उनके परिजन को पूरा दिन इंतजार की पीड़ा भोगनी पड़ती है। छिंदवाड़ा का ही दूसरा उदाहरण वह है, जिसमें सुबह से ऑपरेशन का इंतजार कर रही महिलाओं को शाम को बिना ऑपरेशन के घर भेज दिया गया। पता लगा कि ऑपरेशन के लिए चिकित्सक की ड्यूटी सुनिश्चित नहीं की गई थी।

इस तरह के उदाहरण प्रदेश के कई जिलों में हैं, विशेषकर दूर दराज के और पिछड़े जिलों के। सरकार को इन उदाहरणों को देखकर कमियों को दूर करने की माकूल व्यवस्था करनी चाहिए। यह समझते हुए कि परिवार कल्याण किसी आम व्यक्ति की बीमारी नहीं है, जिसके लिए वह अस्पताल में आने को मजबूर होगा ही।

जो सामाजिक वातावरण व परिस्थितियां हैं, उनमें सरकार को ही विभिन्न अंगों के माध्यम से लोगों को परिवार कल्याण के ऑपरेशनों के लिए तैयार करना पड़ता है। ऐसे में यदि उनका यथासंभव जल्दी ऑपरेशन नहीं किया गया तो वे बाद में इससे किनारा कर लेंगे। उनका बुरा अनुभव देखकर अन्य लोग भी इससे मुंह मोडऩे लगेंगे। इसलिए जरूरी है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाई जाएं। साथ ही चिकित्सकों की समुचित व्यवस्था भी की जाए, ताकि सारे ऑपरेशन सुबह के समय में ही हो जाएं।

Hari Om Panjwani Desk
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