Prashant Bhushan Case : पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी का बड़ा बयान - SC इस मामले में ज्यादा आगे निकल गया

  • Former Attorney General Soli Sorabjee ने कहा कि हर नागरिक को अपने स्वतंत्र राय रखने का अधिकार है।
  • अगर Prashant Bhushan के आरोप पूरी तरह से निरर्थक पाए जाते हैं, तो उन्हें दंडित करें।
  • Supreme Court अवमानना के जुर्म में उन्हें अधिकतम 6 महीने तक की कैद या 2 हजार रुपए का जुर्माना अथवा दोनों की सजा सुना सकती है।

नई दिल्ली। अदालत की अवमानना मामले ( Contempt of Court ) में सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) के सख्त रुख के बाद अधिवक्ता प्रशांत भूषण ( Prashant Bhushan ) के पक्ष में पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी ( Former Attorney General Soli Sorabjee ) ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) ज्यादा आगे निकल गया। उनका कहना है कि भूषण को इस केस में सजा नहीं मिलनी चाहिए बल्कि सुप्रीम कोर्ट को उन्हें चेतावनी देकर छोड़ देना चाहिए था।

सोली सोराबजी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस केस में कोर्ट को उन्हें ज्यादा से ज्यादा फटकार लगानी चाहिए थी। उन्हें चेतावनी देते न कि सज़ा। कोर्ट को उनके पहले ट्वीट को नजरअंदाज करना चाहिए था। दूसरे ट्वीट में उनकी राय थी। हर नागरिक को अपने स्वतंत्र राय रखने का अधिकार है।

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अगर कोई कहता है कि न्यायाधीश भ्रष्ट हैं तो उसे अपने आरोप को सही साबित करने का अवसर दें। मैं दोहराता हूं, अगर प्रशांत भूषण के आरोप पूरी तरह से निरर्थक पाए जाते हैं, तो उन्हें दंडित करें। लेकिन उससे पहले नहीं। आप सिर्फ ये नहीं मान सकते और कह सकते हैं कि उन्हें गलत साबित करने का मौका दिए बिना वे गलत हैं।

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने

सुप्रीम कोर्ट ने 14 अगस्त को प्रशांत भूषण को न्यायपालिका के प्रति दो ट्वीट के लिए आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रशांत के इन ट्वीट को ‘जनहित में न्यायपालिका की कार्यशैली की स्वस्थ आलोचना के लिए किया गया’ नहीं कहा जा सकता। अदालत की अवमानना के जुर्म में उन्हें अधिकतम 6 महीने तक की कैद या 2 हजार रुपए का जुर्माना अथवा दोनों की सजा सुना सकती है।

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प्रशांत भूषण ने माफी मांगने से किया इनकार

अदालत की अवमानना मामले में दोषी पाए जाने के बाद अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगने से इनकार कर दिया था। प्रशांत भूषण ने कहा कि वो इस मामले में सजा से नहीं डर रहे और उन्हें अदालत की दया या उदारता की दरकार नहीं है। उन्हें जो भी सजा दी जाएगी वो मंजूर है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण को अवमानना का दोषी माना है। अदालत ने उन्हें बगावती बयान पर पुनर्विचार करने और बिना शर्त माफी मांगने के लिए गुरुवार 24 अगस्त तक का समय दिया है।

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