चंद्रयान-2: विक्रम लैंडर की सच्चाई, इसरो चीफ के सिवन ने ऐसे बताई

  • आईआईटी दिल्ली के दीक्षांत समारोह में पहुंचे सिवन।
  • सिवन ने भविष्य की कार्य योजना के बारे में दी जानकारी।
  • अंजाने में उन्होंने विक्रम लैंडर को लेकर कई सवाल सुलझा दिए।

नई दिल्ली। मिशन चंद्रयान-2 को लेकर कोई न कोई जानकारी सामने आती ही रहती है। शनिवार को इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) चीफ के सिवन ने आईआईटी दिल्ली के 50वें दीक्षांत समारोह में बातों-बातों में चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर को लेकर उठ रहे सबसे बड़े सवाल का जवाब दे दिया।

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दरअसल, के सिवन ने आईआईटी दिल्ली में शनिवार को कहा कि इसरो चंद्रमा पर लैंडिंग का एक और प्रयास करेगा। इसरो इस बात के प्रदर्शन को लेकर दृढ़निश्चय है कि वो चंद्रमा पर 'सॉफ्ट लैंडिंग' कर सकता है। इसके लिए इसरो वह कार्य योजना बनाने में लगा है कि कैसे चंद्रमा पर लैंडिंग का प्रयास किया जाए।

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उन्होंने आगे कहा कि इसरो ने विक्रम के चंद्रमा पर लैंडिंग के प्रयास को लेकर काफी मात्रा में आंकड़े (डाटा) जुटा लिए हैं ताकि चीजों को सही ढंग से किया जा सके।

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सिवन ने आगे कहा, "चीजों को बिल्कुल सही करने के लिए काफी अहम डाटा उपलब्ध है। मैं यह आश्वस्त करना चाहूंगा कि चीजों को सही करने के लिए इसरो अपना पूरा अनुभव, ज्ञान और तकनीकी कौशल लगा देगा और निकट भविष्य में सॉफ्ट लैंडिंग करके दिखाएगा।"

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यह है हकीकतः

  • अब अगर इसरो चीफ के इस बयान को बारीकी से समझा जाए और बीते 7 सितंबर को हुए विक्रम लैंडर के संपर्क टूटने के बाद के घटनाक्रम को देखा जाए, तो यह सारी हकीकत बयां कर देता है।
  • आईआईटी दिल्ली में इसरो चीफ ने जब कहा कि वो चंद्रमा पर लैंडिंग का एक और प्रयास करेंगे, तो इसका सीधा सा मतलब निकलता है कि इस बार का प्रयास सफल नहीं हो पाया।
  • इसके बाद उन्होंने बताया कि इसरो चंद्रमा पर लैंडिंग कैसे की जाए, इसके लिए कार्य योजना बनाने में जुटा है, तो इसका मतलब कि पहले प्रयास में इसरो ने संभवता वो जरूरी कार्य योजना नहीं बनाई या फिर बारीकियों को नहीं देखा।
  • विक्रम के लैंडिंग से जुड़े आंकड़े इकट्ठा करके चीजों को सही ढंग से करने की बात का अर्थ यह निकलता है कि इसरो ने अपने पहले प्रयास में संभवता 'किस्मत' का सहारा लिया था।
  • इसरो अब जो अपना अनुभव, तकनीकी कौशल और ज्ञान सॉफ्ट लैंडिंग को दूसरे प्रयास में सफल बनाने में लगाएगा, वो पहले प्रयास में भी ऐसा कर सकता था, क्योंकि इसरो से पहले भी दुनिया की तमाम स्पेस एजेंसियों ने कई ग्रहों पर अपने लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग सटीक ढंग से करवाई है।
  • और सबसे अंत में सबसे महत्वपूर्ण बात... कि चंद्रयान-2 का विक्रम अपनी सॉफ्ट लैंडिंग में असफल रहा और इसने हार्ड लैंडिंग की। अगर इसरो चाहता तो विक्रम को सॉफ्ट लैंडिंग कराने के लिए भी और ज्यादा शोध कर सकता था।
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अमित कुमार बाजपेयी
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