माओवादी बताकर जेल भेजा, अब 12 साल बाद जेल से बाहर आई

  • खुद लड़ी लड़ाई : निर्मलक्का जगदलपुर सेंट्रल जेल में थीं बंद
  • वर्ष 2007 में निर्मलक्का को रायपुर में गिरफ्तार किया गया था
  • 150 से ज्यादा मामले थे, 137 मामलों की पैरवी खुद की

जगदलपुर (छत्तीसगढ़)। देश में यह अपने आप में अनूठा मामला होगा कि किसी महिला पर माओवादी गतिविधियों में संलिप्त होने के एक-दो नहीं, बल्कि 150 से ज्यादा केस हों और वह सभी केसों में कोर्ट से दोषमुक्त हुई हो। उनके खिलाफ पुलिस को न गवाह मिले और ना ही सबूत। खास बात यह कि 157 माओवादी मामलों में पिछले 12 साल से जगदलपुर सेंट्रल जेल में बंद निर्मलक्का ने इनमें से 137 केसों में अपनी पैरवी खुद की। निर्मलक्का ने बुधवार को 12 साल बाद जेल से रिहा होकर आजादी की सांस ली।

दंतेवाड़ा कोर्ट में मंगलवार को अंतिम फैसले के बाद बुधवार की सुबह निर्मलक्का जब बाहर आईं तो उन्हें लेने बस्तर की सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोढ़ी भी पहुंची थीं। यहां निर्मलक्का से 'पत्रिका' ने बात की तो उन्होंने बताया कि उसने जो नहीं किया, वह उसकी पूरी सजा भुगत चुकी है। अभी वह सोचने-समझने की स्थिति में नहीं हैं, वह सबसे पहले घर जाकर अपने पति और बच्चे से मिलना चाहती हैं।

दरअसल, 5 जुलाई 2007 को पुलिस ने निर्मलक्का समेत तीन लोगों को रायपुर से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने पहले तो कुछ नहीं बताया। बाद में कहा कि निर्मलक्का मद्देड़ एरिया की सचिव और दण्डकारण्य क्रांतिकारी महिला संगठन की सचिव भी थीं। निर्मलक्का के साथ उनके पति जयपाल रेड्डी उर्फ चंद्रशेखर और नारायणपुर जिले के बेलूर के रहने वाले महेंद्र को हिरासत में लिया गया था।

राज्य के खिलाफ विद्रोह जैसे संगीन आरोप

निर्मलक्का पर पुलिस ने हत्या का प्रयास, हत्या, राज के खिलाफ विद्रोह, हिंसा, आगजनी, सुरक्षाबलों पर हमला करने जैसे 157 मामले दर्ज किए थे। इतने संगीन आरोप होने के बावजूद पुलिस उन्हें कोर्ट में साबित नहीं कर पाई और निर्मलक्का एक-एक कर सभी आरोपों से दोषमुक्त हो गईं।

40 से अधिक महिलाएं अभी भी बंदी

ऐसा नहीं है कि बस्तर में सिर्फ निर्मलक्का ही ऐसी महिला थीं, जिन पर इतने अधिक मामले और लंबे समय से जेल में बंद थी। जगदलपुर सेंट्रल जेल में अभी भी 40 से अधिक महिलाएं बंद हैं। वे सात साल से अधिक समय से यहां बंदी हैं।

समय के साथ मामले बढ़ते चले गए

निर्मलक्का को वर्ष 2007 में गिरफ्तार किया गया था। शुरुआत में उनके खिलाफ चार मामले दर्ज किए गए। लेकिन समय के साथ मामले बढ़ते चले गए। वर्ष 2016 तक उन पर करीब 157 मामले दर्ज हो गए। जिनकी आखिरी सुनवाई दंतेवाड़ा कोर्ट में हुई और यहां अंतिम मामले में भी उन्हें कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया।

कलक्टर को अगवाकर निर्मलक्का की रिहाई चाहते थे माओवादी

बता दें कि वर्ष 2012 में सुकमा के तत्कालीन कलक्टर एलेक्स पॉल मेनन को ताड़मेटला इलाके से अगवा कर लिया था। करीब 12 दिनों तक अपने साथ रखने के दौरान माओवादियों ने सरकार से सौदेबाजी करते हुए कलक्टर की रिहाई के बाद आठ माओवादियों को रिहा करने की शर्त रखी थी। जिसमें गोपन्ना, निर्मलक्का और शांतिप्रिया के नाम भी शामिल थे। यह वही निर्मलक्का हैं, जिन्हें अगवा कलक्टर एलेक्स पॉल मेनन की रिहाई के बदले माओवादी जेल से रिहा कराना चाहते थे।

पति 10 साल जेल में रहने के बाद रिहा

निर्मलक्का को छत्तीसगढ़ पुलिस ने रायपुर से उसके पति चंद्रशेखर और एक अन्य आरोपी के साथ पकड़ा था। निर्मलक्का पर जो आरोप लगाए गए थे, लगभग वही मामले चंद्रशेखर पर भी लगाए गए थे। चंद्रशेखर भी करीब 10 साल जेल में रहने के बाद दिसंबर 2017 में रिहा हुए।

कौन है निर्मलक्का

तेलंगाना के श्रीकाल की निवासी निर्मलक्का शादी के बाद पति के साथ चित्तूर में रह रही थीं। पुलिस के मुताबिक निर्मलक्का मद्देड़ एरिया कमेटी की सचिव, डीवीसी मेंबर और दण्डकारण्य क्रांतिकारी महिला संगठन की सचिव थीं। वह शहरी नेटवर्क को बढ़ाने और इलाज के लिए पति चंद्रशेखर के साथ रायपुर गई थीं। वहां उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

 

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Navyavesh Navrahi
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