सरकारी रिपोर्ट में खुलासा, यूपी से चार गुना महंगा है गुजरात में इलाज

भारत के सभी ग्रामीण घरों में से एक चौथाई और पांच शहरी परिवारों में से एक को उधार लेकर अस्पताल के भर्ती होने के खर्चों को चुकाना पड़ता है।

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Published: 11 Dec 2017, 04:48 PM IST

नई दिल्ली। देश में अस्पतालों के मनमानी और लापरवाही के खबरें अक्सर आती रहती हैं। हाल ही में बड़े निजी अस्पतालों के निरंकुश रवैये के कई मामले देखने को मिले हैं। अब केंद्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा ब्यूरो के आंकड़ों से एक और गंभीर तथ्य सामने आया है। इसमें ये दावा किया गया है कि भारत के सभी ग्रामीण घरों में से एक चौथाई और पांच शहरी परिवारों में से एक को उधार लेकर या किसी कीमती सामान को बेचकर अस्पताल के भर्ती होने के खर्चों को चुकाना पड़ता है।

सरकारी रिपोर्ट में खुलासा
यह आंकड़े केंद्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा ब्यूरो ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोफाइल 2017 के रिपोर्ट में छापा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गांव हो या शहर दोनों जगह इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती होना बहुत महंगा हो गया है।

यूपी से गुजरात में 4 गुना महंगा इलाज
इस मामले में ग्रामीण क्षेत्रों वाले राज्यों में गुजरात सबसे महंगा है। जबकि उत्तर प्रदेश सबसे सस्ता है। आंकड़ों के हिसाब से गुजरात में प्रति केस की कीमत लगभग 32,500 रुपए है जबकि उत्तर प्रदेश में किसी बीमारी के लिए भर्ती होने पर औसत 7,242 रूपए का खर्च आता है। इस हिसाब से गुजरात उत्तर प्रदेश से चार गुना ज्यादा महंगा है।

असम में 52,368 रूपए आता खर्च
वहीं राजधानी दिल्ली में प्रति केस के हिसाब से लगभग 7,737 रूपए का खर्च आता है जो कि आंकड़ों के हिसाब से शहरी इलाकों में सबसे सस्ता है। इसके विपरीत आसाम में किसी बीमारी के इलाज में भर्ती होने पर औसतन 52,368 रूपए का लगते हैं जो की दिल्ली से लगभग सात गुना अधिक महंगा है।

मैक्स और फोर्टिस पर गिरी गाज
खर्चों के महंगाई के ये आकड़ें तब सामने आएं है, जब हाल ही में निजी अस्पतालों के लापरवाही के तीन बड़े मामले सामने आये हैं। ये मामले शालीमार बाग के मैक्स हॉस्पिटल, गुरुग्राम के फोर्टिस हॉस्पिटल के ब्लड बैंक, और तैमूर नगर के न्यूटेक सेंटर का है। जहां मैक्स हॉस्पिटल पर जीवित बच्चों को मृत बताने की लापरवाही पर कार्यवाई की गयी वहीं फोर्टिस हॉस्पिटल के ब्लड बैंक का भी लाइसेंस रद्द कर जांच के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा एक मेडिकल सेंटर ने एक शख्स को गलती से HIV पॉजिटिव बताया था, जिसके बाद दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने उसका लाइसेंस रद्द कर दिया था।

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