Republic Day 2018 : राजपथ पर नारी शक्ति ने दिखाया पराक्रम, दंग रह गए 10 आसियान देश

Republic Day 2018 : राजपथ पर नारी शक्ति ने दिखाया पराक्रम, दंग रह गए 10 आसियान देश

Chandra Prakash Chourasia | Publish: Jan, 26 2018 09:31:49 AM (IST) | Updated: Jan, 26 2018 11:51:12 AM (IST) इंडिया की अन्‍य खबरें

देश आज 69वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। राजपथ पर राष्ट्रपति ने तिरंगा फहराकर कार्यक्रम की शुरुआत की। आज दुनिया हिंदुस्तान की ताकत से रुबरु हो रही है।

नई दिल्ली। देश आज अपना 69वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस मौके पर राजपथ पर पूरी दुनिया हिंदुस्तान की ताकत से रुबरु हुई। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तिरंगा फहराकर कार्यक्रम की शुरुआत की। तीनों सेनाए परेड में अपने अदम्य साहस का जौहर दिखाया। आजादी के बाद पहली बार आसियान देशों के राष्ट्र प्रमुख भारतीय गणतंत्र दिवस में शिरकत किया। इसी वजह से परेड में उनके देश का राष्ट्रीय ध्वज और उनकी संस्कृति की झलक दिख रही है। गणतंत्र दिवस के मौके पर देशभर में स्थान-स्थान पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। पूरे देश में सुरक्षा चाक चौबंद है।

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26 जनवरी से जुड़े कुछ अहम तथ्य
-26 जनवरी 1950 को 10 बजकर 18 मिनट पर देश का संविधान लागू किया गया।
- भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने गवर्नमेंट हाऊस में 26 जनवरी 1950 को शपथ ली थी।
-पहले गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के इर्विन स्टेडियम में झंडा फहराया गया था।
- गणतंत्र दिवस की पहली परेड 1955 को दिल्ली के राजपथ पर हुई थी।
- मोर को भारत का राष्ट्रीय पक्षी 26 जनवरी 1963 को ही घोषित किया गया था।
-1950 से 1954 के बीच गणतंत्र दिवस का समारोह इर्विन स्टेडियम किंग्सवे, लाल किला तो कभी रामलीला मैदान में हुआ करता था।
-26 जनवरी को ही सारनाथ के अशोक स्तंभ पर बने सिंह को राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया गया था।

आज ही लागू हुआ था संविधान

26 जनवरी को 1950 को हमारा संविधान लागू हुआ था। लेकिन क्या आपको पता है कि 26 जनवरी को ही गणतंत्र दिवस क्यों मनाते हैं। इसी दिन देश का संविधान क्यों लागू किया गया, 26 नवंबर 1949 को ही हमारा संविधान बन कर तैयार हो गया था, फिर इसे लागू करने के लिए दो महीने क्यों इंतजार किया गया।

जानते हैं कि ऐसा क्यों हैं
आजादी की लड़ाई के शुरुआती दौर में हमारे देश के नेता पूर्ण स्वराज की मांग नहीं कर रहे थे। वह डोमिनन स्टेटस के पक्ष में थे। अगर ऐसा होता तो यूके का मोनार्च ही भारतीय संविधान का अध्यक्ष होता।
1927 तक भगत सिंह और हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोशिएशन की भारतीय राजनीति में मांग बढऩे लगी थी। इन्होंने सबसे पहले भारत की पूरी आजादी की बात की। भगत सिंह और हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोशिएशन की इस मांग का असर इंडियन नेशनल कांग्रेस पर भी पड़ा। इसके बाद कांग्रेस के युवा नेता सुभाष चंद्र बोस, जवाहर लाल नेहरु आदि जैसे कुछ नेता इस मांग के समर्थन में आए और उन्होंने कांग्रेस से मांग की वे भी पूर्ण स्वतंत्रता की मांग करें, हालांकि तब कांग्रेस ने उनकी मांग को अस्वीकार कर दिया।


दिसंबर 1928 में इंडियन नेशनल कांग्रेस डोमिनन स्टेट का प्रस्ताव लाई और इसके लिए ब्रिटिश सरकार को एक साल का समय दिया। ब्रिटिश सरकार ने इस प्रस्ताव को भी अस्वीकार कर दिया। उसने तर्क दिया कि भारत डोमिनन स्टेटस के लिए अभी तैयार नहीं है। इस बात से कांग्रेस के अंदर क्षोभ और बढ़ा। इस बीच 1929 में लाहौर अधिवेशन एक सेशन के दौरान नेहरू को अध्यक्ष चुन लिया गया। अधिवेशन में उन्होंने पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव दिया। वोटिंग के जरिये इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद एक प्रस्ताव पारित कर 1930 में जनवरी के आखिरी रविवार को स्वतंत्रा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। जनवरी का आखिरी रविवार 26 तारीख को पड़ा। इस दिन पंडित नेहरू ने लाहौर में रवि नदी के किनारे तिरंगा फहराया। इसे कांग्रेस ने स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया, हालांकि ब्रिटिश सरकार ने इसे बगावत के रूप में देखा।
इसके बाद 1946 में ब्रिटेन ने भारत को जल्द ही आजाद किए जाने की घोषणा कर दी। इसके बाद 1946 में संविधान सभा का गठन किया गया। इसके बाद 15 अगस्त 1947 को भारत को आजादी मिली। हालांकि तब तक हमारा संविधान बनकर तैयार नहीं हुआ था। 2 साल 11 महीने 18 दिन की अथक मेहनत के बाद 26 नवंबर 1949 को हमारा संविधान पूर्ण हो गया, लेकिन तब इसे लागू करने के लिए दो महीने रुकने का निर्णय लिया गया। इसका कारण था कि 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वतंत्रता की जो घोषणा की गई थी, उसके याद में हमारे नेता यह चाहते थे कि गणतंत्र दिवस को उसी दिन की याद में 26 जनवरी को मनाया जाए। इसलिए पहला गणतंत्र दिवस २६ जनवरी 1950 को मनाया गया।

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