रोहिंग्या प्रकरण: SC आज सुना सकता है बड़ा फैसला, जानी-मानी हस्तियों ने भी लिखा PM को पत्र

Mohit sharma

Publish: Oct, 13 2017 10:39:29 AM (IST) | Updated: Oct, 13 2017 03:23:30 PM (IST)

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रोहिंग्या प्रकरण: SC आज सुना सकता है बड़ा फैसला, जानी-मानी हस्तियों ने भी लिखा PM को पत्र

इस पत्र में कहा गया कि सरकार को रोहिंग्या शरणार्थियों को शरण देकर दुनिया के सामने मानवता की मिसाल पेश करनी चाहिए।

नई दिल्ली। भारत समेत पूरी दुनिया के लिए चर्चा का मुद्दा बने रोहिंग्या शरणार्थी मामले में सुप्रीम कोर्ट आज अपना फैसला सुनाएगा। सुप्रीम कोर्ट आज इस मामले में सुनवाई करेगा, जिससे इस बार पर अंतिम मुहर लग जाएगी कि रोहिंग्या शरणार्थियों को देश में रहने दिया जाएगा या वापस भेजा जाएगा। वहीं रोहिंग्या मुस्लिमों को म्यांमार वापस भेजने के सरकार के फैसले के खिलाफ प्रसिद्ध लोगों ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है। इस पत्र में पीएम से अनुरोध किया गया है कि रोहिंग्या शरणार्थियों को भारत में ही रहने दिया जाए।

51 हस्तियों ने लिखा पत्र

दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी को लिखे गए इस पत्र में कहा गया कि सरकार को रोहिंग्या शरणार्थियों को शरण देकर दुनिया के सामने मानवता की मिसाल पेश करनी चाहिए। बता दें कि इस पत्र में 51 बड़ी शख्सियतों ने अपने हस्ताक्षर किए हैं। इन लोगों ने पत्र के माध्यम से मोदी से आग्रह किया है कि रखाइन से अपना घर छोडक़र आए हजारों रोहिंग्या मुसलमानों के लिए सरकार को एक कड़ा फैसला लेना चाहिए। दो पन्नों के इस पत्र को ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन एम्नेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने तैयार किया है।

भारत ने किया था विरोध

भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर इन रोहिंग्या शरणार्थियों को देश की अस्मिता के लिए खतरा बताया था। गृह मंत्रालय की ओर से पेश किए गए हलफनामें कहा गया था कि रोहिंग्या लोग देश की सुरक्षा के लिए खतरा है और देश की सुरक्षा से किसी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता है। हलफनामें में यह भी कहा गया था कि कई रोहिंग्या लोग आतंकी गतिविधि में शामिल हैं और उनके आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठनों से संबंध पाए गए हैं। वहीं हलफनामे में रोहिंग्या शरणार्थियों ने कहा कि उनके साथ भी तिब्बतियों और श्रीलंका के शरणार्थियों की तरह ही बर्ताव किया जाए। उन्होंने कहा है कि रोहिंग्या का आईएसआई और इस्लामी स्टेट जैसे किसी भी आतंकी संगठन से कोई संपर्क नहीं है। भारत में ऐसा कोई रोहिंग्या नहीं है जो राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल है। भारत ने 1951 के यूएन रिफ्यूजी कन्वेंशन में रिफ्यूजियों के लिए किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किया था। केन्द्र सरकार ने अवैध रूप से 40,000 रोहिंग्याओं को वापस भेजे जाने की बात कही थी।

 

 

 

 

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