विश्व हिंदू कांग्रेस में शामिल होने के लिए शिकागो जाएंगे मोहन भागवत, आएंगे 80 देश के प्रतिनिधि

विश्व हिंदू कांग्रेस में शामिल होने के लिए शिकागो जाएंगे मोहन भागवत, आएंगे 80 देश के प्रतिनिधि

7 सितंबर से 9 सितंबर तक आयोजित होने वाले विश्व हिंदू कांग्रेस में 80 देशों से 2,500 से ज्यादा प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

नई दिल्ली। संघ प्रमुख मोहन भागवत इस हफ्ते शुरू हो रहे विश्व हिंदू कांग्रेस के सम्मेलन में शामिल होने के लिए शिकागो जाएंगे। यहां वो इस सम्मेलन में मुख्य वक्त के तौर पर शामिल होंगे। मोहन भागवत के लिए ये खुद एक बड़ी उपलब्धि है। सम्मेलन के आयोजकों ने बताया है कि इस सम्मेलन में दुनिया भर से कई हिंदू नेता शिरकत करेंगे। 7 सितंबर से 9 सितंबर तक आयोजित होने वाले विश्व हिंदू कांग्रेस में 80 देशों से 2,500 से ज्यादा प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

भागवत के अलावा ये भारतीय हस्तियां भी होंगी सम्मेलन में शामिल

विश्व हिंदू कांग्रेस के संयोजक अभय अस्थाना ने बताया कि यह सम्मेलन हिंदुओं को आपस में जोड़ने, विचारों का आदान-प्रदान करने, एक-दूसरे को प्रेरित करने का वैश्विक मंच है। अस्थाना विश्व हिंदू परिषद की अमेरिका इकाई के भी अध्यक्ष हैं। भागवत के अलावा तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा, श्री श्री रविशंकर, सूरीनाम के उपराष्ट्रपति अश्विन अधीन, आरएसएस के संयुक्त सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले, एमआईटी के प्रोफेसर एस पी कोठारी, मोहनदास पई, अनुपम खेर, राजू रेड्डी, स्वामी परमात्मानंद सरस्वती, चंद्रिका टंडन, प्रफेसर सुभाष काक भी सम्मेलन में वक्ता के तौर पर शिरकत कर सकते हैं।

क्या होगी सम्मेलन की थीम

जानकारी के मुताबिक, अपने संबोधन में भागवत इस सम्मेलन के थीम ‘सुमनत्रिते सुविक्रांते’ (सामूहिक रूप से चिंतन करें, वीरतापूर्वक प्राप्त करें) पर जोर दे सकते हैं। विश्व हिंदू कांग्रेस के आयोजकों में से एक और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के पूर्व छात्र स्वामी विज्ञानानंद ने एक सवाल के जवाब में बताया कि आरएसएस प्रमुख दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बसे हिंदुओं के एकजुट होने और मानवता के हित में एक ही तरह से सोचने की जरूरत पर जोर दे सकते हैं।

धार्मिक सम्मेलन नहीं होगा विश्व हिंदू कांग्रेस

उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘यह कोई धार्मिक सम्मेलन नहीं है।’ विज्ञानानंद ने कहा, ‘विश्व हिंदू कांग्रेस का मकसद हिंदू समाज को एकजुट करना है और इसके साथ ही समाज के हितों का ख्याल रखना और दुनिया के दूसरे वंचित, हाशिये पर रहने वाले समुदायों की मदद करना है। यह सम्मेलन न तो धार्मिक है और न ही दार्शनिक है। सम्मेलन में समुदाय से जुड़े मुद्दों पर जोर दिया जाएगा।

80 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि लेंगे हिस्सा

विज्ञानानंद ने कहा कि तीन दिवसीय सम्मेलन में 80 से ज्यादा देशों के 2,500 से ज्यादा प्रतिनिधि और 250 से ज्यादा वक्ता हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में आर्थिक, शैक्षणिक, मीडिया, सांगठनिक, राजनीतिक और महिलाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सत्र का आयोजन होगा। इसमें वैश्विक हिंदू समुदाय के मूल्यों, रचनात्मकता और उद्यमी भावना को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

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