संघ ने की मदर टेरेसा का भारत रत्न वापस लेने की मांग, ममता बनर्जी ने जताया विरोध

संघ ने की मदर टेरेसा का भारत रत्न वापस लेने की मांग, ममता बनर्जी ने जताया विरोध

Dhirendra Mishra | Publish: Jul, 13 2018 03:03:03 PM (IST) | Updated: Jul, 13 2018 03:12:15 PM (IST) इंडिया की अन्‍य खबरें

आरएसएस का कहना है कि भारत के नागरिक यह नहीं चाहते कि भारत रत्न पर कोई दाग लगे।

नई दिल्‍ली। रांची के मिशनरीज ऑफ चैरिटी से जुड़े होम से एक नवजात शिशु को बेचने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। यह मामला सामने आने के बाद आरएसएस और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि मदर टेरेसा के इन चैरिटी केंद्रों से बच्चे बेचने की बात अगर सही साबित होती है तो दिवंगत मदर टेरेसा को दिया भारत रत्न सम्मान सरकार को वापस लेना चाहिए।

भारत रत्‍न वापस लेने की मांग
आरएसएस दिल्ली प्रचार प्रमुख राजीव तुली ने ने इस बारे में कहा है कि अगर मिशनरीज ऑफ चैरिटी के खिलाफ लगे आरोप सही साबित होते हैं, तो मदर टेरेसा को सामाजिक‍ कार्य के लिए मिला भारत रत्न वापस ले लेना चाहिए। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी तुली की इस मांग का समर्थन किया। तुली ने कहा कि भारत के नागरिक यह नहीं चाहते कि भारत रत्न पर कोई दाग लगे। मदर टेरेसा को 1980 में भारत रत्न दिया गया था। तब भी ऐसे आरोप लगते थे और आज भी आरोप लग रहे हैं। तुली का कहना है कि मदर टेरेसा ने कभी भी लोक कल्याण के लिए कोई काम नहीं किया। उन्‍होंने मानवीयता के नाम पर धूल झोंकने का काम किया।

दुर्भावनापूर्ण बयान
इसके विपरीत पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मदर टेरेसा द्वारा स्थापित इस संस्था का खुलकर पक्ष लिया है। उन्‍होंने मदर टेरेसा के चैरिटी का समर्थन करते हुए कहा है कि भारत रत्‍न वापस लेने की मांग दुर्भावनावश बताया है। उन्‍होंने कहा कि जान बूझकर टेरेसा को बदनाम किया जा रहा है।

स्‍वामी ममता से बहस को तैयार
भाजपा नेता सुबमह्यण्‍म स्वामी ने तुली की मांग पर अपनी प्रतिक्रिया में बताया है कि मैं इसका 100 फीसदी समर्थन करता हूं। स्वामी ने कहा कि ब्रिटिश लेखक क्रिस्टोफर की किताब द मिशनरी पोजीशन: मदर टेरेसा इन थ्योरी ऐंड प्रैक्‍टिस में पूरा दस्तावेज दिया गया कि किस प्रकार मदर टेरेसा ने जालसाजी की। उन्‍होंने सीएम ममता बनर्जी की टिप्पणी का जवाब देते हुए कि वो इस मुद्दे पर ममता बनर्जी से बहस करने के लिए तैयार हैं।

क्या है यह विवाद?
दरअसल ये मसला तब सामने आया था जब इस साल मई में मिशनरीज ऑफ चैरिटी से जुड़े होम से एक नवजात शिशु को एक दंपति ने 1.20 लाख रुपए में खरीद लिया था। इस दंपति से नवजात के जन्म और चिकित्सा देखभाल के नाम पर ये रकम ली गई थी। दंपति का आरोप है कि चैरिटी संस्थान की ओर से ये आश्वासन देकर बच्चा वापस ले लिया कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चा लौटा दिया जाएगा। जब बच्चा वापस नहीं मिला तो दंपति ने इसकी शिकायत स्‍थानीय चाइल्ड वेलफेयर कमेटी से कर दी। अब इस बात को लेकर विवाद जारी है।

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